शिमला। हिमाचल प्रदेश के निर्माता और पहले मुख्यमंत्री डॉ. यशवंत सिंह परमार की पुण्यतिथि इस बार बिना किसी सरकारी कार्यक्रम के गुजर गई, जिससे सूबे में सियासत गरमा गई है। हर साल शिमला के रिज मैदान पर पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी जाती रही है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। विपक्ष ने इसे सरकार की बड़ी चूक बताया है और सवाल उठाए हैं कि प्रदेश के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले नेता को आखिर क्यों नजरअंदाज किया गया।

विपक्ष ने इसे बताया दुर्भाग्य पूर्ण

दरअसल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि, प्रदेश सरकार की ओर से इस मौके पर कोई औपचारिक कार्यक्रम आयोजित नहीं कर पाना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

 

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सरकारी स्तर पर कार्यक्रम न होने को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इसे दुर्भाग्य पूर्ण बताया और कहा कि ऐसे महान नेता को भूलना प्रदेश के लिए सही संदेश नहीं देता।

हर साल रिज मैदान पर दी जाती है श्रद्धांजलि

विदित हो, डॉ. परमार का निधन 2 मई 1981 को हुआ था। बीते 45 वर्षों से उनकी पुण्यतिथि और जयंती पर शिमला के रिज मैदान स्थित उनकी प्रतिमा पर सरकारी स्तर पर श्रद्धांजलि दी जाती रही है। इस परंपरा के तहत मुख्यमंत्री, मंत्री और विभिन्न दलों के नेता उन्हें याद करते रहे हैं, लेकिन इस बार ऐसा कोई आयोजन नहीं हुआ।

 

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हिमाचल निर्माण में डॉ. परमार की ऐतिहासिक भूमिका

डॉ. परमार को हिमाचल प्रदेश के निर्माण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका के लिए जाना जाता है। उन्होंने पहाड़ी क्षेत्रों की अलग पहचान के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया और प्रशासनिक ढांचे को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रयासों से ही हिमाचल को पहले केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला और बाद में 25 जनवरी 1971 को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।