शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक दिलचस्प विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनके कई सहयोगी अक्सर केंद्र की मोदी सरकार पर वित्तीय सहायता रोकने और हिमाचल के साथ सौतेला व्यवहार करने के आरोप लगाते रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी ही सरकार के कद्दावर मंत्री विक्रमादित्य सिंह का दिल्ली कनेक्शन प्रदेश के लिए संजीवनी साबित हो रहा है।
विक्रमादित्य सिंह जब भी दिल्ली दरबार में हाजिरी लगाते हैं, हिमाचल की झोली में करोड़ों के प्रोजेक्ट्स डालकर ही लौटते हैं। अब एक बार फिर विक्रमादित्य सिंह केंद्र से 366 करोड़ रुपये की बड़ी मंजूरी लेकर आए हैं, जो प्रदेश की शहरी आधारभूत संरचना की तस्वीर बदल देगा।
विक्रमादित्य के विभाग को केंद्र से 366 करोड़ की मंजूरी
विक्रमादित्य सिंह के प्रयासों से केंद्र सरकार ने शहरी विकास विभाग की परियोजनाओं के लिए 366 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह स्वीकृति विशेष सहायता योजना 2025-26 के तहत मिली है, जिससे हिमाचल के शहरों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का रास्ता साफ हुआ है। हाल ही में विक्रमादित्य सिंह ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मनोहर लाल खट्टर से भेंट कर प्रदेश के मुद्दों को मजबूती से रखा था, जिसके परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। मंत्री ने इसे प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे शहरी सुविधाओं और विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
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बड़े प्रोजेक्ट से बदलेगी शहरों की तस्वीर
इन परियोजनाओं में शिमला की सब्जी मंडी के पुनर्विकास के लिए 140 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जहां आधुनिक कॉम्प्लेक्स, पार्किंग, होटल और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वहीं हमीरपुर के पुराने बस स्टैंड को 80 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सिटी सेंटर में बदला जाएगा। इसके अलावा धर्मशाला में भी शहरी सुधार योजना के तहत विकास कार्यों को मंजूरी मिली है।
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केंद्र के साथ बेहतर तालमेल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक दिलचस्प राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ राज्य सरकार केंद्र पर संसाधन न देने के आरोप लगाती है, तो दूसरी तरफ उसी सरकार के मंत्री लगातार केंद्र से योजनाओं की मंजूरी लेकर आ रहे हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि केंद्र और राज्य के बीच संवाद और तालमेल के जरिए विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
सड़क विकास में भी बड़ा निवेश
केवल शहरी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर काम होने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 1500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण 2300 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। यह कार्य अप्रैल से शुरू होने जा रहा है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
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गुणवत्ता और भूमि सबसे बड़ी चुनौती
विक्रमादित्य सिंह ने साफ कहा कि सरकार के पास बजट की कमी नहीं है, लेकिन सड़क निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध करवाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने लोगों से सहयोग की अपील की और चेतावनी दी कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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राजनीति के बीच विकास का संतुलन
इस घटनाक्रम ने हिमाचल की राजनीति में एक नया विमर्श शुरू कर दिया है—क्या केंद्र और राज्य के बीच टकराव के बावजूद विकास संभव है? फिलहाल, विक्रमादित्य सिंह की यह पहल दिखाती है कि अगर प्रयास सही दिशा में हों, तो राजनीतिक मतभेदों के बीच भी प्रदेश के लिए संसाधन जुटाए जा सकते हैं।
