#राजनीति
March 17, 2026
सुक्खू सरकार ने हरियाणा MLA की मेहमाननवाजी पर खर्च किए लाखों रुपए, बिल देख उड़े होश
आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमाचल की सरकार ने करवाई नेताओं की मौज
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में इन दिनों सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन इसी बीच सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि सरकार ने जनता के पैसों से हरियाणा के कांग्रेस विधायकों की मेहमाननवाजी पर भारी रकम खर्च कर दी। सुक्खू सरकार ने पड़ोसी राज्य के नेताओं की आवभगत में सरकारी खजाने के दरवाजे खोल दिए और उनकी मेहमानवाजी पर लाखों रुपए खर्च कर दिए। जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है और जनता के बीच नाराजगी भी बढ़ती नजर आ रही है।
दरअसल राज्यसभा चुनाव के दौरान हरियाणा में चल रही सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस ने अपने 31 विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए हिमाचल का रुख किया। इन विधायकों को किसी सामान्य सरकारी विश्राम गृह के बजाय शिमला के सबसे महंगे और आलीशान निजी होटलों में ठहराया गया।
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जानकारी के अनुसार कुफरी के रेडिसन होटल और गलू के ट्विन टावर जैसे विलासिता पूर्ण स्थानों को इन विधायकों का ठिकाना बनाया गया। इन होटलों के कमरों का किराया ही लाखों में है, लेकिन सरकार ने विधायकों की किलेबंदी के लिए खर्च की परवाह नहीं की। विधायकों के साथ.साथ सांसद, प्रदेश प्रभारी, पार्टी अध्यक्ष और उनके विशाल सुरक्षा अमले सहित लगभग 60 लोगों की फौज के लिए ठहरने की जो व्यवस्था की गई, उसने सरकारी संसाधनों पर अप्रत्याशित दबाव डाल दिया है।

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इन सभी इंतजामों पर करीब 30 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। यह खर्च जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के माध्यम से किया गया बताया जा रहा है। अब सवाल उठ रहा है कि जब प्रदेश आर्थिक दबाव में है, तब बाहरी राज्य के नेताओं की खातिरदारी पर इतनी बड़ी राशि क्यों खर्च की गई। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को जोर.शोर से उठाते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और इसे जनता के पैसे का दुरुपयोग बताया जा रहा है।
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प्रदेश की आम जनता के बीच भी इस खर्च को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि जहां एक ओर विकास कार्यों और जनहित योजनाओं के लिए संसाधनों की कमी बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर नेताओं की मेहमाननवाजी पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह मुद्दा अब केवल खर्च तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
इस फिजूलखर्ची के उजागर होने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य के भीतर यह चर्चा आम है कि एक तरफ सरकार कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के लिए बजट का रोना रोती है, वहीं दूसरी ओर बाहरी राज्यों के विधायकों के ऐश-ओ-आराम पर लाखों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं।
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इस पूरे घटनाक्रम ने हिमाचल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकार पर विपक्ष लगातार दबाव बना रहा है और इस मामले में स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और क्या इस खर्च की जिम्मेदारी तय की जाती है या नहीं। फिलहालए यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा तूल पकड़ सकता है।