शिमला। हिमाचल प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए दिवाली पर राहत की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार त्योहार के मौके पर कर्मचारियों और पेंशनरों को महंगाई भत्ते (DA) की अगली किस्त देने की तैयारी कर रही है। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो प्रदेश के करीब 3.50 लाख से अधिक कर्मचारी, पेंशनर और उनके परिवारों को इसका लाभ मिल सकता है। लंबे समय से महंगाई भत्ते की अगली किस्त का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह दिवाली की बड़ी सौगात साबित हो सकती है।

 

सरकारी स्तर पर डीए भुगतान को लेकर वित्त विभाग में चर्चा के बाद प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हैं। हालांकि, अभी डीए की दर और भुगतान की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

 

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3 से 5 फीसदी तक मिल सकता है महंगाई भत्ता

दिवाली पर कर्मचारियों और पेंशनरों को कितनी राहत मिलेगी, इसका फैसला सरकार की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के बाद हो सकता है। प्रस्ताव में महंगाई भत्ते की दर में 3 या 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के विकल्पों पर विचार किया गया है। यदि सरकार 3 प्रतिशत डीए बढ़ाने का फैसला लेती है, तो राज्य के खजाने पर सालाना करीब 210 से 220 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वहीं, 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने पर यह खर्च लगभग 350 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तक पहुंच सकता है। ऐसे में सरकार के सामने कर्मचारियों को राहत देने के साथ-साथ राज्य के वित्तीय संसाधनों का संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली समीक्षा के बाद ही स्पष्ट होगा।

 

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3.50 लाख से अधिक परिवारों को लाभ

महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी का लाभ प्रदेश के करीब 1.90 लाख नियमित सरकारी कर्मचारियों और लगभग 1.70 लाख पेंशनरों व पारिवारिक पेंशनभोगियों को मिल सकता है। इस तरह कुल मिलाकर 3.50 लाख से अधिक कर्मचारी-पेंशनर लाभार्थियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण होगा। महंगाई के बीच डीए में बढ़ोतरी से कर्मचारियों और पेंशनरों की मासिक आय में इजाफा होता है। इससे घरेलू बजट को कुछ राहत मिलती है और त्योहार के दौरान खरीदारी तथा दूसरे खर्चों के लिए अतिरिक्त राशि उपलब्ध हो सकती है।

 

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लंबे समय से हो रही डीए की मांग

कर्मचारी और पेंशनर लंबे समय से महंगाई भत्ते की लंबित किस्तें जारी करने की मांग उठाते रहे हैं। ऐसे में दिवाली पर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक फैसला आने की उम्मीद के बीच उनकी नजरें आधिकारिक घोषणा पर रहेंगी।

केंद्र और हिमाचल के डीए में 15 प्रतिशत का अंतर

महंगाई भत्ते के मामले में हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच अंतर भी चर्चा का विषय है। उपलब्ध कराए गए विधानसभा आंकड़ों के अनुसार, केंद्र और राज्य के कर्मचारियों के डीए में 15 प्रतिशत का अंतर बताया गया है। आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 60 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को 45 प्रतिशत डीए मिल रहा है। राज्य के कर्मचारी संगठनों की ओर से लंबे समय से लंबित किस्तें जारी करने की मांग की जा रही है।

 

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कर्मचारी संगठनों की मांग है कि महंगाई भत्ते की बकाया किस्तों को चरणबद्ध तरीके से या एकमुश्त जारी करने पर सरकार विचार करे। ऐसे में यदि दिवाली पर डीए की नई किस्त जारी होती है, तो कर्मचारियों को कुछ राहत जरूर मिल सकती है, हालांकि इससे सभी लंबित किस्तों का भुगतान अपने आप नहीं होगा।

सुक्खू सरकार अब तक दे चुकी है 14 प्रतिशत डीए

दिसंबर 2022 में सत्ता संभालने के समय हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को 31 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा था। इसके बाद सरकार ने अप्रैल 2023 में 3 प्रतिशत डीए बढ़ाने की घोषणा की, जिससे दर 34 प्रतिशत हो गई। इसके बाद वर्ष 2024 में 4 प्रतिशत की किस्त जारी किए जाने से डीए 38 प्रतिशत तक पहुंचा। वर्ष 2025 में दिवाली के अवसर पर 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी और अन्य समायोजनों के बाद इसकी दर 45 प्रतिशत बताई गई है। इस प्रकार उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुक्खू सरकार अपने कार्यकाल में अब तक कुल 14 प्रतिशत डीए बढ़ा चुकी है।

दिवाली पर फैसले का इंतजार

हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते की अगली किस्त लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। सरकार के सामने एक ओर कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने और उन्हें राहत देने की जरूरत है, तो दूसरी ओर राज्य के वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखना भी जरूरी है। फिलहाल, 3 से 5 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी के विकल्प चर्चा में हैं और प्रस्ताव मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए भेजे जाने की जानकारी है। दिवाली पर कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए का तोहफा मिलेगा या नहीं, और यदि मिलेगा तो कितने प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, इसका अंतिम फैसला सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

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