#उपलब्धि
March 21, 2025
हिमाचल की बेटी ने हॉकी स्टिक थाम बनाई अलग पहचान, टीम INDIA में मिली एंट्री
हिमाचल प्रदेश में महिला हॉकी के उज्ज्वल भविष्य का संकेत
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश की होनहार बेटियां हर क्षेत्र में अपनी सफलता का लोहा मनवा रही हैं। हिमाचल प्रदेश की बेटियां अपनी मेहनत, लगन और संकल्पशक्ति से विभिन्न क्षेत्रों में सफलता की नई कहानियां लिख रही हैं। खेल से लेकर शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, उद्यमिता और रक्षा सेवाओं तक, हर क्षेत्र में हिमाचल की बेटियां अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं और समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत बन रही हैं। इसी कड़ी में सिरमौर जिले की बेटी ने भी बड़ा मुकाम हासिल किया है।
गिरिपार क्षेत्र की बेटियां कबड्डी में बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन हॉकी में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। 25 वर्षीय महिमा पुंडीर ने यह असंभव लगने वाला सपना साकार कर दिखाया है। वह हिमाचल प्रदेश की पहली ऐसी महिला गोलकीपर हैं, जिनका चयन सीनियर महिला इंडिया नेशनल हॉकी कैंप के लिए हुआ है।
देशभर की 6 सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों में शीर्ष स्थान
महिमा को राष्ट्रीय स्तर पर चुनी गई 6 बेहतरीन गोलकीपरों में सबसे ऊंचा स्थान प्राप्त हुआ है। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में केवल दो गोलकीपरों को अंतिम टीम में जगह मिलती है, जबकि अन्य को तैयारी के लिए जोड़ा जाता है। उनकी 5 फुट 7 इंच की ऊंचाई उनके खेल के लिए एक मजबूत पक्ष साबित हो सकती है।
दुगाना गांव की महिमा ने अपने क्षेत्र का नाम गर्व से ऊंचा किया है। भले ही गिरिपार क्षेत्र से कई लड़कियां खेलों में आगे बढ़ चुकी हैं, लेकिन हॉकी में यह पहली ऐतिहासिक उपलब्धि है। उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी को भी प्रेरित करेगी।
महिमा पुंडीर से पहले सिरमौर जिले की सीता गोसाई भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रह चुकी हैं और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित होने वाली एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं। करीब 25 वर्षों बाद सिरमौर से एक और बेटी ने भारतीय हॉकी टीम में जगह बनाने की ओर कदम बढ़ाया है। माजरा में एस्ट्रोटर्फ मैदान बनने के बाद यह पहला अवसर है जब किसी खिलाड़ी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
महिमा ने अपने करियर में कई चुनौतियों का सामना किया। वर्ष 2024 में पुणे में हुए नेशनल हॉकी टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद उनका इंडिया कैंप में चयन नहीं हुआ। इस असफलता से वह निराश हो गईं और हॉकी छोड़ने तक का विचार करने लगीं। लेकिन उनकी बड़ी बहन कमलेश तोमर और जिला कबड्डी संघ महासचिव ग्यार सिंह नेगी ने उन्हें प्रोत्साहित किया और उनका मनोबल बढ़ाया।
परिवार के सहयोग से महिमा को भारत की शीर्ष हॉकी अकादमी, ग्वालियर में प्रशिक्षण का अवसर मिला। यहां उन्होंने खेल की बारीकियां सीखीं और निरंतर मेहनत कर अपने प्रदर्शन को और निखारा। इसके बाद सफलता ने उनके कदम चूमने शुरू कर दिए।
महिमा ने अमृतसर में आयोजित ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी हॉकी टूर्नामेंट में आईटीएम यूनिवर्सिटी, मध्य प्रदेश की ओर से खेलते हुए रजत पदक जीता। इसके बाद वह राष्ट्रीय कैंप के लिए भी चुनी गईं। उन्होंने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच चंद्रशेखर, परमजीत बरार, अजीत, पंकज, अपने परिवार और बहनों को दिया है।
महिमा ने कक्षा 8वीं से 12वीं तक हॉकी छात्रावास माजरा में रहकर खेल की नींव रखी। गोलकीपर के तौर पर उन्होंने अब तक 9 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। 2019 में पहली बार भारतीय महिला हॉकी कैंप में स्थान बनाया, लेकिन कोरोना महामारी के कारण खेल गतिविधियां बाधित रहीं। इसके बावजूद उन्होंने अपने अभ्यास को जारी रखा।
महिमा ने 2020 से 2022 तक चंडीगढ़ में अभ्यास किया और इस दौरान केरल (2020), झांसी (2021), भोपाल (2022), काकीनाडा (2023) और पुणे (2024) में हुई नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। वर्ष 2025 में पंचकूला में आयोजित सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में उनके बेहतरीन प्रदर्शन ने उन्हें इंडिया कैंप तक पहुंचाया।
महिमा का कहना है कि जब भी वह कोई गलती करती हैं, तो अपने कोच की डांट उन्हें याद आ जाती है। उन्होंने सीखा है कि अगर जीवन में आगे बढ़ना है, तो माता-पिता, गुरु और कोच का सम्मान करना जरूरी है।
हाल ही में, 21 से 26 फरवरी 2025 को अमृतसर, पंजाब में आयोजित ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी हॉकी चैंपियनशिप में उन्होंने आईटीएम यूनिवर्सिटी, मध्य प्रदेश की ओर से खेलते हुए रजत पदक जीता। साथ ही, वह खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के लिए भी चयनित हो चुकी हैं।
महिमा पुंडीर की यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश में महिला हॉकी के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। उनका सफर यह साबित करता है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से हर सपना पूरा किया जा सकता है। उनकी कहानी आने वाली युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरेगी।