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January 12, 2026

हिमाचल के बेटे को सेना ने दिया बड़ा सम्मान, आतं.की को ढेर कर बचाई चार बच्चों समेत 7 की जान

मेजर अमन के माता-पिता हिमाचल सरकार में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे चुके हैं

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कांगड़ा। वीर भूमि हिमाचल एक बार फिर अपने रणबांकुरे सपूत की अदम्य साहस गाथा के कारण पूरे देश में गौरव का विषय बनी है। भारतीय सेना की हरी वर्दी के प्रति अटूट निष्ठा, मातृभूमि की रक्षा के लिए हर खतरे से टकराने का संकल्प और निर्दोष नागरिकों की जान बचाने का जज्बा- इन सभी गुणों का जीवंत उदाहरण बने हैं पालमपुर के अमन धर।

अभियान में दिखाई बेजोड़ सूझबूझ

9 नवंबर, 2024 को जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना पर सेना की एक क्विक रिएक्शन टीम को तैनात किया गया। इस टीम का नेतृत्व मेजर अमन धर कर रहे थे।

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इलाके में भारी गोलीबारी 

इलाके को घेराबंदी में लेते ही आतंकियों की ओर से भारी गोलीबारी शुरू हो गई। इसी दौरान एक आतंकी गोलियां चलाता हुआ पास के एक रिहायशी मकान में घुस गया, जहां चार बच्चों सहित सात निर्दोष नागरिक फंसे हुए थे।

खुद की भी नहीं की परवाह

स्थिति बेहद संवेदनशील और जानलेवा थी। किसी भी तरह की जल्दबाजी नागरिकों की जान पर भारी पड़ सकती थी। ऐसे में मेजर अमन धर ने असाधारण धैर्य और सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना मकान की पिछली खिड़की से एक-एक कर सभी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।

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नजदीकी मुठभेड़ में आतंकी को किया ढेर

बच्चों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाते समय भी आतंकी की ओर से लगातार खतरा बना हुआ था, लेकिन मेजर अमन धर ने मिशन को पूरी दृढ़ता से अंजाम दिया। नागरिकों को सुरक्षित निकालने के बाद मेजर अमन धर ने आतंकी के सफाए की रणनीति बनाई। JCB की सहायता से उन्होंने आतंकी के ठिकाने तक पहुंच बनाई और बेहद नजदीकी दूरी से मुठभेड़ शुरू की।

आतंकवादियों के ग्रेनेड से भी नहीं डरे

आतंकी ने ग्रेनेड फेंककर भागने का प्रयास किया, लेकिन मेजर अमन धर की तुरंत कार्रवाई ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय देते हुए उन्होंने आतंकी को वहीं ढेर कर दिया और पूरे इलाके को सुरक्षित किया। उनकी इस वीरता ने न सिर्फ एक खतरनाक आतंकी को निष्क्रिय किया, बल्कि सात निर्दोष जिंदगियों को भी नया जीवन दिया।

 

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सेना मेडल से सम्मानित

मेजर अमन धर की इस अद्वितीय बहादुरी और नेतृत्व क्षमता के लिए उन्हें सेना मेडल (गैलेंट्री) से सम्मानित किया गया। यह अलंकरण भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया। जबकि, सम्मान समारोह में पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ने उन्हें यह वीरता पदक पहनाया।

कहां से हुई अमन की स्कूलिंग?

मेजर अमन धर को 9 जून 2018 को कोर ऑफ सिग्नल्स में कमीशन मिला। उन्होंने टैक्निकल एंट्री स्कीम के अंतर्गत कैडेट्स ट्रेनिंग विंग, महू में चार वर्षों का कठोर सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने सेंट पॉल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पालमपुर से ग्रहण की। जल्द ही अमन की शादी चंबा निवासी शिवाली रैना से होने जा रहा है।

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परिवार में देश सेवा का माहौल

मेजर अमन धर के पिता अनिल शर्मा और माता मंजू शर्मा हिमाचल प्रदेश सरकार में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। उनकी एक बहन पूर्णिमा धर हैं- जिनका विवाह लेफ्टिनेंट कमांडर वरुण जोशी से हुआ है। पारिवारिक माहौल में देश सेवा की भावना हमेशा से रही है, जिसका प्रभाव अमन धर के व्यक्तित्व में स्पष्ट झलकता है। 

पालमपुर में खुशी और गर्व का माहौल

मेजर अमन धर को मिले इस सम्मान से पूरे पालमपुर क्षेत्र में गर्व और खुशी की लहर है। गांव उस्तेहड़ दयोग्रां से लेकर पूरे कांगड़ा जिला में लोग इस वीर सपूत की बहादुरी की चर्चा कर रहे हैं। मेजर अमन धर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हिमाचल की धरती आज भी देश को ऐसे जांबाज सपूत देती है- जो कर्तव्य, साहस और मानवता के सर्वोच्च आदर्शों पर खरे उतरते हैं।

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देश को दिए कई वीर

विदित रहे कि, पालमपुर की धरती ने देश को पहले भी ऐसे-ऐसे वीर सपूत दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्र रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। देश के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा से लेकर कारगिल के अमर नायक कैप्टन विक्रम बत्रा, शहीद मेजर सुधीर वालिया, शहीद कैप्टन सौरभ कालिया, नायक राकेश कुमार, करमचंद कटोच जैसे असंख्य रणबांकुरों की परंपरा को मेजर अमन धर ने अपने साहसिक कार्य से आगे बढ़ाया है।

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