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January 11, 2026
हिमाचल पंचायत चुनाव: निर्वाचन आयोग ने बुलाई बैठक, अब CM सुक्खू की पुनर्गठन प्रक्रिया का क्या होगा
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद हरकत में आया निर्वाचन आयोग, आयुक्त ने बुलाई बैठक
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को लेकर महीनों से चल रही राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान के बीच अब तस्वीर साफ होती नजर आ रही है। प्रदेश उच्च न्यायालय के सख्त आदेशों के बाद राज्य निर्वाचन आयोग हरकत में आ गया है। हालांकि यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या सुक्खू सरकार इस फैसले को अंतिम मानकर चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी या फिर चुनाव टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। फिलहाल, हाईकोर्ट के निर्देश मिलते ही निर्वाचन आयोग ने चुनावी तैयारियों की दिशा में कदमताल शुरू कर दी है।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी तक सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने और 30 अप्रैल से पहले चुनाव संपन्न करवाने के आदेश दिए हैं। इस आदेश के तुरंत बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने सोमवार को आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुला ली है, जिसमें न्यायालय के निर्देशों की गहन समीक्षा की जाएगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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सोमवार को होने वाली इस अहम बैठक में हाईकोर्ट के आदेशों के प्रत्येक बिंदु पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न चरणों, आरक्षण रोस्टर, मतदाता सूचियों का अधिसूचनाकरण, चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा और प्रशासनिक समन्वय पर निर्णय लिए जाएंगे। आयोग का प्रयास है कि न्यायालय द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें।
सूत्रों के अनुसार, निर्वाचन आयोग जल्द ही प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बैठक करेगा। उद्देश्य यह है कि सरकार और आयोग मिलकर चुनाव प्रक्रिया को समय पर और निष्पक्ष तरीके से पूरा करें। हाईकोर्ट ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि दोनों संस्थाएं आपसी समन्वय से चुनाव कराएं।
चुनावी प्रक्रिया के बीच एक बड़ा सवाल पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर भी है। सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने सात नई पंचायतों के गठन और करीब 74 पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की थी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह तय किया जाना है कि इन बदलावों को चुनाव से पहले लागू किया जाए या फिलहाल स्थगित रखा जाए। इस विषय पर सरकार और निर्वाचन आयोग मिलकर अंतिम निर्णय लेंगे।
चुनाव को लेकर आगे की दिशा तय करने में 16 जनवरी को प्रस्तावित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक को भी अहम माना जा रहा है। इस बैठक में हाईकोर्ट के फैसले पर विस्तार से चर्चा होने और उसी के अनुरूप आगे की प्रक्रिया तय किए जाने की संभावना है। यहीं से यह भी संकेत मिल सकता है कि सरकार चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प अपनाएगी या नहीं।
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प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था की त्रिस्तरीय संरचना के तहत 3577 ग्राम पंचायतों, 91 पंचायत समितियों, 12 जिला परिषदों के साथ-साथ सात नगर निगमों और अन्य शहरी निकायों के चुनाव होने हैं। इन चुनावों के लिए आरक्षण रोस्टर का जारी होना और जिला उपायुक्तों द्वारा मतदाता सूचियों का अधिसूचनाकरण अनिवार्य है। इसके बाद ही मतदान की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
हाईकोर्ट के फैसले से यह उम्मीद जरूर जगी है कि लंबे समय से लटके पंचायत चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति खत्म होगी। हालांकि अंतिम तस्वीर तब साफ होगी जब प्रदेश सरकार यह तय करेगी कि वह इस निर्णय को स्वीकार कर चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है या फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाती है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची ने कहा कि सोमवार को आयोग के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है। न्यायालय के आदेशों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी, ताकि समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ा जा सके। फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद चुनावी मशीनरी सक्रिय हो चुकी है और अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम और आगामी बैठकों पर टिकी हैं।