#हादसा
October 8, 2025
हिमाचल : एक ही चिता पर हुआ मां-बेटे का अंतिम संस्कार, परिजनों की चीखों से सहमा इलाका
दोनों भाइयों का रो-रो कर हो रहा बुरा हाल- सहमे हुए हैं बच्चे
शेयर करें:

बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के फगोग गांव के हर घर में आज मातम पसरा हुआ है। गांव के एक परिवार के चार लोगों की हुई भयानक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। आज जब एक घर से एक साथ चार लोगों की अर्थियां निकली तो पूरा इलाका चीखों से दहल उठा।
हादसे में दो सगे भाइयों का परिवार उजड़ गया है। एक भाई की पत्नी और दो बेटों की मौत हो गई है। जबकि, दूसरे भाई की पत्नी हादसे का शिकार हो गई है। आज सुबह चारों के शव घर पहुंचे तो परिजनों में चीथख-पुकार मच गई।
शवों को कुछ देर घर पर रखने के बाद उनका गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। श्मशान घाट में चारों लोगं की चिताएं एक साथ जलाई गई। मां-बेटे को एक ही चिता पर जलाया गया।
फौजी ने अपनी पत्नी और बेटों की चिता को मुखाग्नि दी। जबकि, हादसे में मौत को मात देकर मलबे से सुरक्षित निकले आठ वर्षीय शौर्य ने अपनी मां की चिता को मुखाग्नि दी। इस हादसे के बाद शौर्य और उसकी बहन आरुषि काफी सहमे हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, कमलेश रिश्ते में अंजना की जेठानी थी। कल सुबह कमलेश अंजना के साथ उसके मायके गंगलोह गांव में एक फंक्शन में शामिल होने गई थी। इस दौरान दोनों के बच्चे भी साथ थे- जिसमें अंजना का बेटे आरव-नक्ष और कमलेश के बच्चे आरुषि और बेटा शौर्य शामिल हैं। यह सभी लोग शाम के वक्त फंक्शन से बस में वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में बस हादसे का शिकार हो गई।
परिजनों ने बताया कि अंजना के मायके वाले उन्हें अपनी गाड़ी से घर छोड़ने आ रहे थे। मगर अंजना नहीं मानी और बस में जाने की जिद्द करने लगी। मगर किसी को क्या पता था कि काल इन लोगों का रास्ते में इंतजार कर रहा था।
हादसे में अंजना, कमलेश, नक्ष और आरव की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि, कमलेश की बेटी आरुषि और बेटा शौर्य मलबे में दब गए। NDRF टीम ने दोनों बच्चों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला।
अंजना के पति विपिन कुमार भारतीय सेना में सैनिक हैं। इस हादसे में विपिन की बड़े भाई राजकुमार की पत्नी कमलेश की भी मौत हो गई है। जबकि, उसकी बेटी और बेटा गंभीर रूप से घायल हैं। इस हादसे ने दोनों भाइयों की जिंदगी उजाड़ दी है। विपिन का बड़ा बेटा नक्ष तीसरी और आरव UKG में पढ़ता था।
बच्चों ने बताया कि उनके कानों में अभी तक मां, चाची और दोनों छोटे भाइयों की चीखें गूंज रही हैं। आरुषि ने जब बताया कि बस में क्या हुआ था, तो सुनकर सबकी रूह कांप गई। उसने कहा कि “मैं आगे की सीट पर बैठी थी। अचानक जोर की आवाज आई, बस हिल गई और फिर सब अंधेरा हो गया। चारों तरफ चीखें थीं, कोई किसी को नहीं देख पा रहा था। फिर किसी ने मेरा नाम पुकारा और मुझे बाहर निकाला। आरुषि बच गई, लेकिन उसकी मां कमलेश उसी बस में दम तोड़ चुकी थीं।
विपिन ने रोते-रोते कहा कि ऐसा लगा रहा कि जैसे मेरे दोनों बाजू कट गए हैं। उन्होंने कहा कि भगवान इतना निर्दयी कैसे हो सकता है। उसे मेरा चार साल का मासूम बच्चा नहीं दिखा। मेरी पत्नी, मेरे दोनों मासूम बच्चों को उसने छीन लिया। अब मैं जी कर क्या करूंगा- किसके सहारे जिंदा रहूंगा।
लोगों ने बताया कि दोनों भाइयों ने कभी एक-दूसरे के बच्चों को अलग नहीं समझा। दोनों देवरानी-जेठानी भी बहनों की तरह एक-दूसरे के साथ रहती थीं और ज्यादातर जगहों पर एक साथ ही जाती थी। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जैसे दोनों हर दिन की साथी थीं, वैसे ही दोनों एक साथ ये दुनिया भी छोड़ देंगी।
इस हादसे में दोनों सगे भाइयों के हंसते-खेलते परिवार उजाड़ दिए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दोनों भाइयों की आपस में बहुत बनती थी। इतना ही नहीं दोनों भाइयों की पत्नियों यानी देवरानी-जेठानी के बीच भी बहुत प्यार था।