#हादसा
January 24, 2026
हिमाचल की सड़कों पर शाम 6 से रात 12 बजे तक सबसे ज्यादा खतरा, 789 लोगों ने गंवाया जीवन
साल 2025 में 1920 वाहन हुए दुर्घटनाओं का शिकार
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शिमला। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। साल दर साल बढ़ते हादसे न सिर्फ परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं, बल्कि सैकड़ों परिवारों को कभी ना भरने वाले जख्म दे रहे हैं।
वर्ष 2025 में प्रदेश भर में कुल 1920 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 789 लोगों की मौके पर या उपचार के दौरान मौत हो गई। इन हादसों में 3030 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें कई को गंभीर चोटें आई हैं।
नए साल की शुरुआत भी हादसों की भयावह तस्वीर के साथ हुई। सिरमौर जिले में पेश आए एक दर्दनाक बस हादसे में 14 लोगों की जान चली गई, जिसने एक बार फिर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी।
सड़क सुरक्षा समिति, राज्य पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है कि दुर्घटनाओं का एक तय समय और क्षेत्रीय पैटर्न बन चुका है। शहरी इलाकों में सबसे अधिक सड़क हादसे शाम छह बजे से रात 12 बजे के बीच हुए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहर तीन बजे से रात नौ बजे तक का समय सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान यातायात दबाव, थकान, ओवरस्पीड और लापरवाही प्रमुख कारण बनते हैं। राजधानी जिला शिमला में भी सड़क हादसों की संख्या चिंताजनक रही। जिला RTO विश्व मोहन देव चौहान के अनुसार, वर्ष 2025 में शिमला जिला में कुल 268 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं।
इन हादसों में 102 लोगों की मौत हुई, जबकि 436 लोग घायल हुए। आंकड़े बताते हैं कि जिले में औसतन हर तीन सड़क दुर्घटनाओं में एक व्यक्ति की जान गई। शिमला जिले के कुछ पुलिस थाना क्षेत्र हादसों के लिहाज से अधिक संवेदनशील साबित हुए।
नेशनल हाईवे पर भी हादसों की स्थिति चिंताजनक रही। शिमला जिला के शहरी क्षेत्रों में 74 और ग्रामीण क्षेत्रों में 194 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि ग्रामीण इलाकों में हादसों की संख्या कहीं अधिक है। वर्ष 2025 में-
जांच में यह भी सामने आया है कि ओवरस्पीडिंग, नशे में वाहन चलाना और यातायात नियमों की अनदेखी दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण रहे। अकेले शिमला जिले में ऐसे कारणों से 208 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 77 लोगों की मौत दर्ज की गई।
जिला प्रशासन अब हादसों को कम करने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सड़क सुरक्षा समिति के दायरे को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। अब यह समिति प्रत्येक उपमंडल में संबंधित SDM की अध्यक्षता में काम करेगी। इसमें सभी XEN, DSP और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे। पहले यह समिति केवल जिला स्तर तक सीमित थी।
उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने की स्थिति में चार लाख रुपये की एक्सग्रेशिया राशि 15 दिनों के भीतर जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित उपमंडल के SDM की होगी, ताकि पीड़ित परिवारों को राहत के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
इसके अलावा, जिला भर से सड़क दुर्घटनाओं में घायल होकर शिमला के अस्पतालों में रेफर किए जाने वाले मरीजों को वित्तीय व अन्य सहायता उपलब्ध करवाने के लिए SDM शिमला शहरी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।