#विविध
January 24, 2026
हिमाचल में घर के बाहर खड़ी गाड़ी का आंध्र प्रदेश में कटा TOLL, वो भी चार बार- मालिक के उड़े होश
पुलिस चौकी के चक्कर, समाधान नहीं
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक चौंकाने वाला और चिंता बढ़ाने वाला मामला सामने आया है, जिसने फास्टैग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक महिला की घर के बाहर खड़ी गाड़ी का आंध्र प्रदेश में चालान कटा है।
मोबाइल पर आए मैसेज ने गाड़ी मालिक महिला और उसके परिवार को सकते में डाल दिया। यह मामला बल्ह थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत लुहाखर का है। मामले के उजागर होने के बाद ऑनलाइन चालान काटने की व्यवस्था लोगों में चर्चा का विषय बन गई है।
यहां रहने वाली नीता देवी ने 22 जनवरी को अपनी गाड़ी HP-82-9341 को रोज की तरह घर के बाहर पार्क किया था। सुबह करीब 11:30 बजे उनके मोबाइल फोन पर एक मैसेज आया, जिसमें आंध्र प्रदेश के करपाडु टोल प्लाजा पर 120 रुपये टोल कटने की सूचना थी। जबकि उस वक्त गाड़ी हिमाचल प्रदेश में ही खड़ी थी।
इस एक मैसेज के बाद मामला यहीं नहीं रुका। 22 और 23 जनवरी के दौरान आंध्र प्रदेश के अलग-अलग टोल प्लाजा से फास्टैग के जरिए कुल चार बार कैश कट गया। देखते ही देखते फास्टैग में मौजूद पूरा बैलेंस खत्म हो गया। यह देख परिवार की चिंता और हैरानी दोनों बढ़ गई।
नीता देवी के पति रविंद्र ने बताया कि वह 21 जनवरी को किसी निजी कार्य से चंडीगढ़ गए थे और वापसी के दौरान फास्टैग में लगभग 600 रुपये का बैलेंस शेष था। गाड़ी मंडी में ही खड़ी थी, इसके बावजूद हजारों किलोमीटर दूर टोल कटना किसी साइबर गड़बड़ी या फास्टैग क्लोनिंग की ओर इशारा कर रहा है।
पीड़ित परिवार जब शिकायत लेकर पुलिस चौकी रिवालसर पहुंचा तो उन्हें बताया गया कि यह मामला साइबर क्राइम से जुड़ा हो सकता है। वहां फोन नंबर दर्ज करवाने की बात कही गई, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से परिवार को निराशा हाथ लगी। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) में शिकायत दर्ज करवाने की सलाह दी गई।
वहीं, NHAI में शिकायत तो दर्ज कर ली गई है, लेकिन अब तक किसी अधिकारी ने उनसे संपर्क नहीं किया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होता, वे फास्टैग में दोबारा पैसे डालने से भी डर रहे हैं, क्योंकि फिर से रकम कटने का पूरा अंदेशा बना हुआ है।
रविंद्र ने सवाल उठाया है कि जब गाड़ी घर पर खड़ी है तो फास्टैग का इस्तेमाल आंध्र प्रदेश में कैसे हो सकता है। यह उनके लिए न केवल आर्थिक नुकसान का मामला है, बल्कि रोजमर्रा की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है। परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कर फास्टैग से जुड़े इस तरह के साइबर फ्रॉड पर रोक लगाई जाए।