#हिमाचल
January 24, 2026
7 महीने बाद अमरीश राणा को मिली जमानत, HC ने पुलिस से पूछा- सबूत कहां है?
संगठित अपराध के आरोपी अमरीश राणा को मिली जमानत
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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी के साथ संगठित अपराध से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी व्यक्ति का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड ही उसे जमानत से वंचित करने का अकेला आधार नहीं बन सकता, जब तक मौजूदा केस में गंभीर अपराध की ठोस भूमिका साबित न हो। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ऊना जिले के गगरेट थाने में दर्ज मामले में आरोपी अमरीश राणा को नियमित जमानत दे दी है।
यह केस ऊना जिले के गगरेट थाना क्षेत्र का है। FIR के अनुसार 15 अप्रैल 2025 को स्वां नदी के पास JCB और टिप्पर चालकों को दराट दिखाकर डराया गया। आरोप है कि वाहनों के टायर काटे गए और इंजनों में कोई हानिकारक पदार्थ डाला गया। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 (संगठित अपराध) समेत कई धाराएं दर्ज की थीं।
मामले की सुनवाई वेकेशन जज राकेश कैंथला की अदालत में हुई। कोर्ट ने पाया कि संगठित अपराध की धारा लगाने के लिए जो जरूरी शर्तें होती हैं, वे इस केस में पहली नजर में पूरी नहीं हो रही हैं। अदालत के मुताबिक रिकॉर्ड में यह स्पष्ट नहीं है कि आरोपी के खिलाफ पिछले 10 वर्षों में दो या उससे अधिक चार्जशीट दाखिल हुई हों, जो इस धारा के लिए जरूरी होती हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि FIR में फिरौती का कोई जिक्र नहीं है। घटना में किसी को शारीरिक चोट पहुंचने की बात भी सामने नहीं आई। इसके अलावा आरोपी से कोई हथियार भी बरामद नहीं हुआ। अदालत ने इन तथ्यों को जमानत के पक्ष में अहम माना।
हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि इसी मामले में अन्य सह-आरोपियों को पहले ही सुप्रीम कोर्ट और सत्र न्यायालय से जमानत मिल चुकी है। ऐसे में समानता के आधार पर अमरीश राणा को भी जमानत देना उचित माना गया। बता दें कि करीब 7 महीने बाद अमरीश राणा को जमानत मिली है।
अदालत ने आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और एक स्थानीय जमानतदार की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही कड़ी शर्तें भी लगाई गई हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि आरोपी किसी भी गवाह को धमकाएगा नहीं और न ही सबूतों से छेड़छाड़ करेगा।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सिर्फ आपराधिक इतिहास होना ही किसी व्यक्ति को जेल में रखने का आधार नहीं बन सकता, जब तक मौजूदा मामले में उसकी गंभीर और सीधी भूमिका स्पष्ट न हो।