#हादसा

November 10, 2025

हिमाचल में धू-धू कर दहका आधा गांव, आंखों के सामने 16 घर, 2 मंदिर; 6 गौशालाएं हुईं राख

सड़क सुविधा ना होने से मौके पर नहीं पहुंच पाई दमकल विभाग की गाड़ियां

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Himachal kullu News

कुल्लू। हिमाचल की शांत तीर्थन घाटी सोमवार को आग की लपटों की चपेट में आ गई। कुल्लू जिले की ग्राम पंचायत नोहांडा के झनियार गांव में दोपहर बाद लगी भीषण आग ने पूरे इलाके को दहला दिया। देखते ही देखते आधा गांव धू.धू कर जल उठा। आग इतनी विकराल थी कि 16 घर, दो प्राचीन मंदिर और छह गौशालाएं जलकर राख के ढेर में बदल गईं। इस दर्दनाक हादसे में 20 से अधिक परिवार बेघर हो गए हैं। इस आगजनी में करोड़ों के नुकसान का अनुमान है। जिसमें लोगों के घर के साथ अंदर रखा सारा सामान और पशुशालाओं में पशुओं का चारा भी राख के ढेर में बदल गया है।

आंखों के सामने लपटों में समाया पूरा गांव 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर करीब पौने दो बजे गांव के एक घर से धुआं उठना शुरू हुआ और कुछ ही पलों में आग ने भयंकर रूप ले लिया। ग्रामीणों ने बाल्टी और पाइप से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लकड़ी से बने घरों में आग इतनी तेजी से फैली कि सब कुछ पलभर में जल गया। 

 

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सड़क सुविधा ना होने से नहीं पहुंची दमकल गाड़ियां

लोगों का कहना है कि गांव तक सड़क सुविधा ना होने के चलते घरों को जलने से नहीं बचाया जा सका। गांव में सड़क सुविधा न होने के कारण दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर नहीं पहुंच सकीं। जिसके चलते लोगों की आंखों के सामने उनके आशियाने धू-धू कर जल गए और वह कुछ ना कर सके। आग पर काबू पाने का प्रयास शाम 5:30 बजे तक जारी रहा, मगर तब तक गांव का आधा हिस्सा राख में तब्दील हो चुका था।

 

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20 परिवारों का सब कुछ जल कर हुआ राख

इस आगजनी ने करीब 20 परिवारों का सबकुछ जलाकर राख कर दिया है। सर्द रातों में अब ये 20 परिवार खुले आसमान तले हैं, जिनकी छतें जलकर राख हो गईं। ग्रामीणों के आंसू और जलते घरों की लपटें दोनों ही इस त्रासदी की भयावहता बयां कर रही थीं। पीड़ित परिवारों को अब अपने बच्चों और बुजुर्गों की चिंता सताने लगी है। क्योंकि कुल्लू जिला में भीषण सर्दी पड़नी शुरू हो गई है। ऐसे बिना छत के यह 20 परिवार कैसे गुजारा करेंगे।

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घर ही नहीं, देवी.देवताओं के मंदिर भी राख

आग ने केवल घरों को ही नहीं, बल्कि गांव के दो पवित्र मंदिरों को भी अपनी चपेट में ले लिया। लोगों की आस्था और परंपराओं के प्रतीक ये मंदिर अब सिर्फ राख और पत्थरों का ढेर बन गए हैं। इसके अलावा छह गौशालाएं और सर्दियों के लिए रखा गया पशुओं का चारा भी पूरी तरह जल गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह आग उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी है। जब उन्होंने अपने घर, मंदिर और रोजमर्रा की जरूरतों को एक साथ लपटों में खो दिया।

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विधायक ने मांगी फौरी राहत

घटना की जानकारी मिलते ही बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि नुकसान करोड़ों रुपये में है और प्रभावितों को तुरंत राहत पहुंचाने की जरूरत है। यह घटना बेहद दर्दनाक है। प्रशासन को चाहिए कि नुकसान का शीघ्र आकलन कर फौरी राहत राशि जारी करे और बेघर परिवारों के रहने की व्यवस्था की जाए।

प्रशासन ने शुरू किया नुकसान का आकलन

कुल्लू जिला प्रशासन की टीम ने देर शाम तक गांव में डेरा डाल दिया और नुकसान का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। राहत शिविर और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था करने के निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह रही कि दिन के समय आग लगने से किसी की जान नहीं गई, और ग्रामीणों ने समय रहते अपने मवेशियों को सुरक्षित निकाल लिया।

 

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सर्दी की मार के बीच आंसुओं का सैलाब

झनियार गांव के लोगों के लिए यह सर्दी किसी दुःस्वप्न से कम नहीं। पहाड़ों की ठंडी हवाओं के बीच जिन घरों की दीवारें गर्माहट देती थीं, अब वहां सिर्फ राख उड़ रही है। बच्चों और बुजुर्गों को पड़ोसी गांवों में ठहराया गया है, लेकिन खोई हुई गृहस्थी और टूटी आस्था का दर्द अब भी हर चेहरे पर झलक रहा है।

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