#यूटिलिटी
December 22, 2025
नए साल से हिमाचल के स्कूलों में सख्त अनुशासन, मोबाइल समेत 6 उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध
छात्रों पर ही नहीं बल्कि शिक्षकों पर भी सख्ती से लागू होंगे नियम
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने स्कूलों के शैक्षणिक माहौल को अनुशासित और केंद्रित बनाने के लिए एक अहम फैसला लिया है। नए साल से प्रदेश के सभी स्कूलों में मोबाइल फोन ही नहीं] बल्कि स्मार्ट वॉच सहित कुल छह तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को स्कूल परिसर में लाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सरकार का मानना है कि यह निर्णय छात्रों की पढ़ाई] मानसिक विकास और सामाजिक व्यवहार को सकारात्मक दिशा देगा।
राज्य के शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह आदेश सचिव शिक्षा राकेश कंवर के हस्ताक्षर से जारी हुआ है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह नए नियम 1 जनवरी 2026 से पूरे प्रदेश में लागू होंगे। इसके साथ ही स्कूलों के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी जारी किया गया है] ताकि नियमों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
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नए निर्देशों के अनुसार स्कूल परिसर में छात्रों के लिए मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, हेडफोन, गैर-शैक्षणिक टैबलेट या आईपैड, म्यूजिक प्लेयर, हैंड-हेल्ड गेमिंग डिवाइस और रिकॉर्डिंग या सूचना प्रसारण में सक्षम किसी भी प्रकार के उपकरण पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सरकार का कहना है कि इन उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से छात्रों की एकाग्रता, अनुशासन और शैक्षणिक प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकार तकनीक विरोधी नहीं है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) ने शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है। इसी सोच के तहत विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) और यू-डाइस प्लस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई शैक्षणिक एप्लिकेशन और पोर्टल को एकीकृत किया गया है। लेकिन अनियंत्रित और गैर-जरूरी तकनीकी उपयोग से छात्रों में मोबाइल की लत, पढ़ाई से दूरी और अनुशासनहीनता बढ़ रही है, जिसे रोकना जरूरी हो गया था।
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सरकार के अनुसार, छात्रों में मोबाइल फोन की बढ़ती लत एक गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। कक्षा के दौरान ध्यान भटकना, साइबर बुलिंग, बिना अनुमति फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग, डेटा प्राइवेसी का उल्लंघन और आपत्तिजनक कंटेंट तक आसान पहुंच जैसी घटनाएं चिंता का विषय हैं। कई देशों में पहले से ही स्कूल परिसरों में मोबाइल फोन पर सख्त नियंत्रण लागू है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
नए नियमों में स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) की भूमिका भी तय की गई है। एसएमसी बैठकों में अभिभावकों को स्पष्ट रूप से अवगत कराया जाएगा कि उनके बच्चे स्कूल में मोबाइल या अन्य निजी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं लाएंगे। यदि कोई छात्र नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बार-बार नियम तोड़ने पर निष्कासन तक का प्रावधान रखा गया है। आवश्यकता पड़ने पर एसएमसी की सहमति से आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।
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हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गंभीर स्वास्थ्य या सुरक्षा से जुड़ी विशेष परिस्थितियों में अभिभावक के लिखित अनुरोध पर प्रधानाचार्य की अनुमति से छात्र को मोबाइल लाने की छूट दी जा सकती है। ऐसी स्थिति में भी मोबाइल फोन स्कूल में निर्धारित स्थान पर जमा रहेगा और छात्र केवल अवकाश के समय वहीं से कॉल कर सकेगा।
नए निर्देश केवल छात्रों तक सीमित नहीं हैं। शिक्षकों के लिए भी मोबाइल उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। शिक्षक कक्षा, प्रयोगशाला, परीक्षा या अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के दौरान मोबाइल का उपयोग नहीं करेंगे, सिवाय शैक्षणिक या आपात स्थिति के। स्कूल समय में मोबाइल साइलेंट मोड पर रखना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति सोशल मीडिया, गेमिंग या मनोरंजन से जुड़े कंटेंट का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित शिक्षक के खिलाफ सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इन सभी निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी स्कूल के प्रधानाचार्य और मुख्य अध्यापक की होगी। यदि किसी स्कूल में नियमों का पालन नहीं होता है, तो संबंधित प्रधानाचार्य के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि ये नए प्रावधान हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा संहिता के पुराने नियमों का स्थान लेंगे।