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August 26, 2025
हिमाचल में कल इन जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट, पहली तक नहीं मिलेगी राहत
भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने से हिमाचल में हो रही जमकर तबाही
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार जारी भारी बारिश ने प्रदेश भर में भारी तबाही मचाई है। पहाड़ों से लेकर घाटियों तक हर ओर बारिश और उसके बाद होने वाले भूस्खलन, बाढ़, और बादल फटने जैसी घटनाओं ने लोगों की जान.माल को भारी नुकसान पहुंचाया है। राज्य भर में हालात गंभीर बने हुए हैं और कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह से ठप हो गया है।
इस सब के बीच अब मौसम विभाग ने पहली सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी जारी कर दी है। मौसम विभाग की मानें तो प्रदेश भर में कल यानी 27 और 28 अगस्त को प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी रहेगा। वहीं 29 अगस्त से पहली सितंबर तक एक बार फिर प्रदेश पर आसमानी आफत बरसने के आसार हैं। 29 से पहली सितंबर तक प्रदेश के कई जिलों में भारी से भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
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मौसम विभाग की मानें तो कल यानी 27 अगस्त को प्रदेश के मंडी, शिमला और गुरुवार को ऊना, कांगड़ा में येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान प्रदेश के अधिकतर इलाकों में मौसम साफ रहेगा। 30 अगस्त को प्रदेश भर में मौसम खराब रहेगा। इस दौरान कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला में ऑरेंज अलर्ट, जबकि अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
राज्य में हो रही लगातार मूसलधार बारिश के चलते नदियां और नाले उफान पर हैं। कुल्लू, मंडी, कांगड़ा, किन्नौर और लाहौल.स्पीति जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान की खबरें सामने आई हैं। इन क्षेत्रों में अनेक जगहों पर भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिससे कई सड़कें बंद हैं और बिजली.पानी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।
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राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में अब तक 306 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 38 लोग लापता हैं और 367 लोग घायल हुए हैं। अब तक 3186 मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिनमें से 693 पूरी तरह से ढह गए हैं। अकेले मंडी जिले में ही 1500 मकानों को नुकसान पहुंचा है। राज्य में 77 बार फ्लैश फ्लड, 81 बार भूस्खलन, और 41 बार बादल फटने की घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। कुल मिलाकर अब तक 2394 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। इसमें लोक निर्माण विभाग को 1310 करोड़ और जल शक्ति विभाग को 813 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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राज्य में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 3 नेशनल हाईवे सहित 687 से ज्यादा सड़कें अवरुद्ध हो चुकी हैं। मंडी, कुल्लू और शिमला जिलों में सर्वाधिक सड़कें बाधित हैं। मंडी में 342, कुल्लू में 131, कांगड़ा में 67 और शिमला में 45 सड़कें बंद हैं। वहीं 2349 बिजली ट्रांसफॉर्मर ठप्प हो गए थे, जिनमें से 936 को बहाल कर दिया गया है, लेकिन अभी भी 1413 ट्रांसफॉर्मर बंद पड़े हैं, जिससे कई क्षेत्रों में अंधेरा पसरा हुआ है। पेयजल संकट भी विकराल होता जा रहा है। अब तक 234 पेयजल योजनाएं प्रभावित हो चुकी हैं और कई क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति ठप है।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि सभी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू टीमें तैनात हैं। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि कुल्लू और मनाली क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। एनएच-305 पूरी तरह बंद है और केवल लेफ्ट बैंक मार्ग से ही आवाजाही संभव हो रही है। पंडोह बांध से छोड़े गए पानी के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
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राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अवश्यक होने पर ही यात्रा करें, और किसी भी आपात स्थिति में आपातकालीन नंबरों पर संपर्क करें। साथ ही नदी-नालों से दूर रहने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी गई है।