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August 26, 2025

जल शक्ति विभाग के पैरा वर्कर्स की चेतावनी, मांगे नहीं मानी तो 'पानी को तरसेगी हिमाचल'

अपनी मांगों को लेकर विधानसभा के बाहर गरजे पैरा वर्कर्स

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Jal shakti para workers

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में विधानसभा के मानसून सत्र के सातवें दिन चौड़ा मैदान सरकार विरोधी नारों से गूंज उठा। जल शक्ति विभाग के पैरा वर्कर्स ने वर्षों से लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में एकत्र हुए इन कर्मचारियों ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी दृ अगर अब भी हमारी बात नहीं सुनी गई, तो प्रदेशभर में जल आपूर्ति बाधित हो सकती है।

सरकार से वार्ता नहीं, केवल कार्रवाई चाहिए

धरना स्थल पर पैरा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष महेश वर्मा ने तीखे शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा कि बीते चार पांच वर्षों से यूनियन लगातार वेतनवृद्धि, नियमितीकरण और सेवा शर्तों को लेकर सरकार के समक्ष गुहार लगाती रही है, लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने बताया कि बेहद कम वेतन पर मुश्किल हालात में सेवा दे रहे पैरा वर्कर्स अब मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं।

 

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महेश वर्मा ने रोष जताया कि प्रदर्शन के दौरान डिप्टी सीएम का काफिला उनके सामने से गुजरा लेकिन उनकी पीड़ा सुनने की किसी ने जरूरत नहीं समझी। उन्होंने कहा कि नेता चुनाव के समय वोट मांगने हमारे घर.घर आते हैं, लेकिन आज जब हम अपनी बात कहने आए हैं तो कोई बाहर निकलने को तैयार नहीं। यूनियन ने साफ किया कि वे किसी मंत्री से अंदर जाकर मुलाकात नहीं करेंगे, नेताओं को खुद बाहर आकर संवाद करना होगा।

 

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भाजपा विधायक हंसराज का आश्वासन

प्रदर्शन के दौरान धरनास्थल पर भाजपा के विधायक हंस राज, विनोद कुमार, रीना कश्यप और इंद्र दत्त लखनपाल भी पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को विपक्ष का पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाया और कहा कि विधानसभा के भीतर उनकी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा। नाचन विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक विनोद कुमार ने कहा कि जल शक्ति विभाग के पैरा वर्कर्स विषम परिस्थितियों में प्रदेशभर के दूरदराज इलाकों में भी सेवा दे रहे हैं। इन कर्मचारियों की मेहनत के बदले जो वेतन दिया जा रहा है, वह अपमानजनक है। सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

 

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जल संकट की चेतावनी

यूनियन ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार आज ही प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर कोई ठोस भरोसा नहीं देती है, तो आगामी दिनों में पूरे प्रदेश की जल आपूर्ति ठप की जा सकती है। प्रदर्शनकारियों की चेतावनी को देखते हुए सरकार पर दबाव बढ़ गया है।

 

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नजरें सरकार के रुख पर

अब सबकी निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वह पैरा वर्कर्स की चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है। क्या सरकार बातचीत का रास्ता अपनाएगीए या यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा  इसका फैसला आने वाले 24 घंटे में हो सकता है। प्रदेश में जल आपूर्ति जैसी अहम सेवा से जुड़े इन कर्मचारियों का असंतोष न केवल प्रशासनिक चिंता का विषय हैए बल्कि इससे आम जनजीवन भी प्रभावित हो सकता है। सरकार और यूनियन के बीच संवाद की पहल अब अनिवार्य हो चुकी है।

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