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August 11, 2025
हिमाचल के 10 जिला में अगले 12 घंटे होगी भयंकर बारिश, तीन दिन नहीं मिलेगी राहत
मौसम विभाग ने कई जिलों में अगले तीन दिन बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून का प्रकोप लगातार कहर बनकर टूट रहा है। मूसलाधार बारिश, भूस्खलन और पहाड़ों से गिरते पत्थरों के कारण जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। प्रदेश भर में आपदा जैसी स्थिति बनी हुई है। रविवार और सोमवार को भी बारिश ने कहर बरपाया, जिससे दो और लोगों की जान चली गई। वहीं, सैकड़ों सड़कें बंद हैं और बिजली.पानी की आपूर्ति ठप पड़ी है। मौसम विभाग ने आगामी चार दिनों तक कई जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका है।
मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में अगले 12 घंटे] यानी सोमवार सुबह 8 बजे तक भारी बारिश का खतरा मंडराता रहेगा। मौसम विभाग ने ताज़ा बुलेटिन जारी कर बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन और ऊना में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और एक-दो स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई है।
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विभाग ने किन्नौर और लाहौल-स्पीति में कई स्थानों पर फ़्लैश-फ्लड की चेतावनी भी जारी की है। कल यानी 12 अगस्त को कांगड़ा और मंडी में भारी बारिश का अलर्ट रहेगा। इसके बाद 13 अगस्त को कांगड़ा, कुल्लू और मंडी में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 14 अगस्त को कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। अन्य जिलों में यलो अलर्ट लागू रहेगा।
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मौसम विभाग के अनुसार, 15 अगस्त को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसून कमजोर पड़ जाएगा और केवल शिमला व कुल्लू में बारिश का यलो अलर्ट रहेगा। वहीं 16 और 17 अगस्त को मानसून और अधिक कमजोर हो जाएगा, जिससे बारिश में कमी आने की उम्मीद है। राज्य सरकार और प्रशासन ने लोगों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचने और मौसम विभाग के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
बिलासपुर जिले में श्री नयनादेवी जी मंदिर से दर्शन कर लौट रहे पंजाब के बठिंडा निवासी कुलविंदर सिंह की पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से मौत हो गई। यह हादसा कनफारा के पास हुआ, जब कुलविंदर अपनी बाइक से लौट रहे थे। साथ में मौजूद एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
किन्नौर जिले में कैलाश यात्रा के दौरान कोलकाता से आए श्रद्धालु सूरज दास की खराब मौसम के चलते मौत हो गई। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी और मौसम की मार श्रद्धालुओं के लिए खतरनाक साबित हो रही है।
कांगड़ा जिले के मंड क्षेत्र में पंजाब सीमा से लगे इलाकों में पौंग बांध से पानी छोड़े जाने के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। कई घरों में पानी घुस गया, जिससे लोगों को घर खाली करने पड़े। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए 16 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य में 316 सड़कें अब भी बंद हैं, जिनमें एक राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल है। सबसे अधिक प्रभावित मंडी जिला है, जहां 181 सड़कें बाधित हैं। कुल्लू जिले में 84 सड़कें और 367 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा राज्य भर में 491 पेयजल योजनाएं भी ठप हैं। नालागढ़ के कुमारहट्टी के समीप पहाड़ी से आए मलबे ने कृत्रिम झील बना दी है, जिससे पास का एक घर खाली करवाना पड़ा है।
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इस साल 20 जून से 11 अगस्त तक हिमाचल प्रदेश में मानसून के चलते अब तक 229 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें से 116 मौतें सड़क हादसों में हुई हैं। वहीं 323 लोग घायल और 36 अब भी लापता हैं। राज्य में अब तक 2,388 मकान और दुकानें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि 1,955 गोशालाएं और 1,611 पालतु पशु मारे गए हैं। आपदाओं से कुल अनुमानित नुकसान 2,007 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
सिरमौर जिले में पांवटा-साहिब-शिलाई-गुम्मा नेशनल हाईवे पर सोमवार सुबह करीब 10 बजे हेवणा के पास भारी भूस्खलन हुआ। इस दौरान आयुष विभाग का वाहन और एक टिपर मलबे की चपेट में आ गए। हालांकि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। सड़क के दोनों ओर सरकारी और निजी बसें फंस गईं। प्रशासन की ओर से मलबा हटाने का कार्य जारी है।