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September 4, 2025
हिमाचल में 6 दिन तक खराब रहेगा मौसम, महिला सहित मलबे में दबे 6 लोग अभी तक नहीं मिले
भारी बारिश जमकर मचा रही तबाही, अब तक 343 लोगों ने गंवा दी है जा*न
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन को पूरी तरह से पटरी से उतार दिया है। राज्यभर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं और आपदा की मार सबसे अधिक ग्रामीण व पर्वतीय क्षेत्रों पर पड़ी है। अब तक मानसून सीजन में 343 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों करोड़ की संपत्ति का नुकसान आंका गया है।
राज्य के कई इलाकों में भूस्खलन के चलते आवागमन ठप हो गया है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार अभी तक छह नेशनल हाईवे सहित कुल 1,292 सड़कें बंद हैं। साथ ही 2,809 बिजली ट्रांसफार्मर और 1,081 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं। विशेषकर चंबा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन और कांगड़ा जिलों में सड़क नेटवर्क बुरी तरह बाधित है। मंडी में सबसे अधिक 293 सड़कें बंद हैं, जबकि कुल्लू में 225 और शिमला में 216 मार्गों पर यातायात ठप है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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कुल्लू जिला मुख्यालय में भूस्खलन की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार सुबह इनर अखाड़ा बाजार में हुए ताजा भूस्खलन में दो मकान मलबे की चपेट में आ गए। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि तीन लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। अभी भी एक महिला सहित छह लोग मलबे में दबे हुए हैं। रेस्क्यू अभियान जारी है और एनडीआरएफ की टीम मौके पर जुटी हुई है। एडीसी कुल्लू अश्विनी कुमार व एसडीएम निशांत कुमार राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। यह तीन दिन के भीतर कुल्लू में भूस्खलन की चौथी बड़ी घटना है, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
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राज्य सरकार ने एहतियात के तौर पर सभी सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को 7 सितंबर तक बंद रखने के आदेश दिए हैं। हालांकि कई ग्रामीण इलाकों में बिजली न होने के कारण ऑनलाइन कक्षाएं भी संभव नहीं हो पा रही हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है।
मौसम विज्ञान केंद्र, शिमला के अनुसार प्रदेश के मध्यवर्ती जिलों में 4 से 9 सितंबर तक रुक.रुक कर बारिश जारी रहेगी। कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, सोलन, शिमला और बिलासपुर में कहीं.कहीं भारी बौछारें गिर सकती हैं। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि अब भारी बारिश का खतरा टल चुका है। किन्नौर और लाहौल.स्पीति जैसे ऊपरी जिलों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क बना रहेगा, जबकि निचले जिलों में ऊना, हमीरपुर और बिलासपुर में बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।
20 जून से शुरू हुए मानसून सीजन के दौरान राज्य में कुल 343 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 160 लोगों की जान सड़क हादसों में गई, जबकि अन्य की मौतें भूस्खलन, बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं में हुई हैं। इसके अलावा अब तक 398 लोग घायल हुए हैं और 43 लोग अभी भी लापता हैं। 5,319 मकान और दुकानें आंशिक या पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जबकि 4,244 गोशालाओं को नुकसान पहुंचा है। 1,908 पालतु पशुओं की मौत की भी पुष्टि की गई है। अनुमान के अनुसार, राज्य को अब तक ₹3,690 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है।
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राज्य सरकार और जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से सभी जिलाधिकारियों को राहत और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन आपसी समन्वय के साथ राहत कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।