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December 22, 2025

नववर्ष तक बेसहारा पशुओं से मुक्त होगा हिमाचल का ये जिला, प्रशासन ने शुरू किया अभियान

डीसी ने जारी की अधिसूचना, एसडीएम की अध्यक्षता में बनाई कमेटी

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Shimla Stray Cattle free

शिमला। हिमाचल प्रदेश की खूबसूरती इन दिनों सड़कों पर घूमते बेसहारा पशुओं के कारण दागदार होती नजर आ रही है। ये पशु न केवल किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं की वजह बनकर आम लोगों और पर्यटकों की जान पर भी खतरा बढ़ा रहे हैं। यही हाल पहाड़ों की रानी शिमला का भी है। हर साल देश-विदेश से लाखों सैलानी राजधानी शिमला पहुंचते हैं, लेकिन यहां उनका स्वागत सड़कों पर बैठे बेसहारा पशु कर रहे हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब जिला प्रशासन ने शिमला को पूरी तरह बेसहारा पशु मुक्त बनाने का अभियान छेड़ दिया है। खास बात यह है कि नए साल के आगमन से पहले ही राजधानी की सड़कों को इन पशुओं से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है।

डीसी ने जारी की अधिसूचना

बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाकर सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाने के लिए जिला उपायुक्त अनुपम कश्यप ने हर उपमंडल स्तर पर समिति गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार संबंधित उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) समिति के अध्यक्ष होंगे। समिति में अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, खंड विकास अधिकारी, थाना प्रभारी, नगर निकाय या पंचायत सदस्य, स्थानीय गौशाला या पशु आश्रय के प्रतिनिधि को सदस्य बनाया गया है।

 

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वहीं, वरिष्ठ पशु चिकित्सक को समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। यह समिति अपने-अपने उपमंडल क्षेत्र में 15 दिनों के भीतर बेसहारा पशुओं को एकत्र कर नजदीकी गौशालाओं तक पहुंचाएगी और इसकी विस्तृत रिपोर्ट 15 दिन बाद उपायुक्त को सौंपेगी।

जनवरी 2026 तक बेसहारा पशु मुक्त होगा जिला 

डीसी की अध्यक्षता में आयोजित विशेष बैठक में निर्णय लिया गया कि जनवरी 2026 तक जिला शिमला के सभी चिन्हित स्थानों से बेसहारा पशुओं को हटाकर गौ सदनों में भेजा जाएगा। इसके लिए 15 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जाएगा, जिसे हर उपमंडल में एसडीएम की अगुवाई में धरातल पर लागू किया जाएगा। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि नववर्ष में पूरा जिला शिमला बेसहारा पशु मुक्त नजर आए।

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272 बेसहारा पशु चिन्हित

जिला प्रशासन के आदेश पर पशुपालन विभाग द्वारा हाल ही में कराए गए सर्वेक्षण में पूरे जिले में 272 बेसहारा पशु चिन्हित किए गए हैं। डीसी अनुपम कश्यप ने कहा कि पशुधन हमारी अमूल्य धरोहर है और इन्हें बेसहारा छोड़ना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पशु मालिकों से अपील की है कि जिन लोगों ने अपने पशु छोड़ दिए हैं, वे स्वयं आगे आकर उन्हें वापस लें। उन्होंने यह भी कहा कि सर्दियों के मौसम में बेसहारा पशुओं की जान को खतरा रहता है और सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं भी इन्हीं के कारण बढ़ती हैं।

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जिले में मौजूद विभिन्न गौ सदनों में लगभग 3500 पशुओं को रखने की क्षमता है, जबकि वर्तमान में करीब 2500 पशु ही वहां रखे गए हैं। ऐसे में चिन्हित 272 बेसहारा पशुओं को क्षमता के अनुसार नजदीकी गौ सदनों में भेजा जाएगा।

इन क्षेत्रों में अधिक संख्या में मिले बेसहारा पशु

पशुपालन विभाग के सर्वेक्षण में जिला के कई इलाकों में बड़ी संख्या में बेसहारा पशु पाए गए हैं। शिमला शहरी क्षेत्र में टुटू चौक, तारा देवी हाईवे, खलीनी में हनुमान मंदिर के समीप बेसहारा पशु अधिक देखे गए हैं। इसके अलावा रामपुर क्षेत्र के नैनी (बढ़ाल), खनेरी अस्पताल के आसपास, झाकड़ी बस स्टॉप, रामपुर बस स्टॉप, तलाई मंदिर, भद्राश बाजार, नीरथ, बिथल, दत्तनगर, ओड्डी और किंगल बाजार में भी पशु चिन्हित किए गए हैं।

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ठियोग उपमंडल के तहत मतियाना, शिलारू, नारकंडा, छैला, कोटखाई और गुम्मा, चौपाल क्षेत्र के तहत नेरवा, फेडिजपुल, गुम्मा और मिनस, जबकि रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल नगर क्षेत्रों में भी बेसहारा पशुओं की मौजूदगी सामने आई है। इन्हीं स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर बेसहारा पशु मुक्त बनाया जाएगा।

सड़कों को सुरक्षित और सुंदर बनाने की पहल

जिला प्रशासन का मानना है कि इस अभियान से न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि शिमला की खूबसूरती और पर्यटन छवि भी और बेहतर होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभियान के दौरान लापरवाही या नियमों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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