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October 31, 2025
क्यों जरूरी है Period Leave ? हिमाचल में नहीं है अब तक कोई पॉलिसी
महिलाओं में आते हैं शारीरिक और भावनात्मक बदलाव
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पीरियड लीव को लेकर कोई पॉलीसी नहीं है। हालांकि डॉक्टर्स मानते हैं कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं को रेस्ट की जरूरत होती है जिससे उनकी बॉडी को आराम मिलता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्यों महिलाओं को पीरियड लीव मिलनी चाहिए।
डॉक्टर्स मानते हैं कि महिलाओं के लिए पीरियड लीव जरूरी है क्योंकि इस दौरान कई तरह के शारीरिक और भावनात्मक बदलाव आते हैं जिसकी वजह से रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है।
पीरियड्स के दौरान होर्मोनल परिवर्तन गर्भाशय में संकुचन का कारण बनते हैं। ऐसे में कई महिलाओं को गंभीर ऐंठन, पीठ में तकलीफ, थकान व सिरदर्द होता है। अलग-अलग महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अलग-अलग अनुभव होते हैं।
कुछ महिलाएं जिन्हें एंडोमेट्रियोसिस या PCOS की समस्या होती है, उनके लिए तो दर्द असहनीय भी हो सकता है। उनके लिए काम करना, ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है। वे तनाव भी महसूस कर सकती हैं।
कई महिलाओं में होर्मोनल बदलाव व खून की कमी के कारण मूड स्विंग, गुस्सा, चक्कर और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं। गौरतलब है कि ये लक्षण मन की शांति छीन सकते हैं। ऐसे में शरीर को आराम करने की आवश्यकता होती है।
पीरियड्स के दौरान, आराम करने, खूब पानी पीने से महिला की ओवरऑल हेल्थ पर अच्छा प्रभाव पड़ सकता है। ये महिलाओं को ज्यादा एनर्जी व कॉन्सन्ट्रेशन के साथ अपनी सामान्य दिनचर्या में वापस आने में मदद कर सकता है।
पीरियड लीव नेचुरल प्रोसेस को समझकर कामकाजी स्थलों पर कम्पैशन को बढ़ावा देती है। पीरियड्स के दौरान महिलाओं को सपोर्ट की जरूरत होती है क्योंकि पीरियड्स उनके आम दिनचर्या के कामों में बाधा डालते हैं।
कुछ लोग मानते हैं कि पीरियड लीव महिलाओं को विशेषाधिकार या विशेष उपचार देना है लेकिन ऐसा नहीं है। ये महिलाओं की स्वास्थ्य आवश्यकताओं का सम्मान करना और उनके भले को प्राथमिकता देना है।
बता दें कि बिहार देश का पहला राज्य है जिसने 1992 में ही महिला कर्मचारियों को 2 दिन की पीरियड लीव की अनुमति दी थी। ये लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में लागू हुई थी। हालांकि ये सरकारी कर्मचारियों तक सीमित है।
1997 में मुंबई स्थित कल्चर मशीन ने एक दिन की छुट्टी देना शुरू किया। 2020 में जोमैटो ने छुट्टी शुरू करने की घोषणा की। इस वक्त भारत में 12 कंपनियां पीरियड लीव देती हैं।
राष्ट्रीय स्तर की बात करें तो देश में पीरियड लीव को लेकर कोई कानून नहीं है। कामकाजी महिलाओं व छात्राओं के लिए पीरियड लीव की मांग वाली एक याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सरकारी नीति के दायरे में आता है।
कुछ सांसदों ने पीरियड लीव को लेकर कई बार संसद में निजी विधेयक पेश किए लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी पीरियड लीव का विरोध कर चुकी हैं। उनके मुताबिक ये कोई बीमारी या विकलांगता नहीं है।