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December 19, 2025

हिमाचल: सेब-अनार छोड़ जापानी फल की ओर बागवान,कमाई में तोड़ रहा सारे रिकॉर्ड

अनार छोड़कर हो रही फल की खेती

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Japanese Fruit

कुल्लू। हिमाचल की पहाड़ियों में अब सिर्फ सेब के बाग ही नहीं, बल्कि खेती की सोच भी बदल रही है। जहां कभी गेहूं, मक्की, सेब और अनार ही बागवानों की पहचान हुआ करते थे, वहीं अब कम खर्च और ज्यादा मुनाफे वाला एक नया फल चुपचाप उनकी जिंदगी में जगह बना रहा है। मौसम की मार और बढ़ती लागत से परेशान बागवान अब जापानी फल की बागवानी को भविष्य का विकल्प मानने लगे हैं। कुल्लू जिले से शुरू हुआ यह बदलाव अब सिर्फ प्रयोग नहीं, बल्कि मुनाफे की पक्की कहानी बन चुका है, जिसने बागवानों की आर्थिकी को नई दिशा दे दी है।

इस सेब का बड़ रहा है दाम 

बता दें कि, पहाड़ी इलाकों में सेब के बाद अब जापानी फल (परसीमन) बागवानों की पसंद बनता जा रहा है। कम लागत, कम देखभाल और बेहतर बाजार भाव के चलते कुल्लू जिले में इसकी बागवानी तेजी से बढ़ रही है। खोखन गांव के बागवान मदनलाल ने बागवानी विभाग की मदद से जापानी फल की खेती शुरु की, जिससे उनकी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

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उनका कहना है कि सेब, अनार जैसी फसलों में जहां कीटनाशक और खादय पर ज्यादा खर्च होता है, वहीं जपानी फल बिना कीटनाशक के तैयार हो जाता है औक बाजार में 120 से 180 रुपये पति किलो तक बिक रहा है। 

अनार छोड़कर हो रही फल की खेती

गड़सा घाटी के बागवान योगराज ठाकुर बताते हैं कि मौसम बदलने से अनार की फसल बार-बार खराब हो रही थी। पेड़ों में बीमारी लग जाती थी और कई बार वे सूख भी जाते थे। फसल बचाने के लिए बार-बार दवाइयों का छिड़काव करना पड़ता था, जिससे खर्च बढ़ जाता था। बाजार में अनार के दाम भी कम मिलते थे। इसलिए उन्होंने अनार के पेड़ काटकर जापानी फल की खेती शुरू की, जिसमें कम खर्च में अच्छा मुनाफा मिल रहा है।

2 साल में खेत का क्षेत्रफल हुआ दोगुना 

प्रदेश सरकार जापानी फल की खेती पर ₹62,500 प्रति हेक्टेयर अनुदान दे रही है। इसके अलावा उपकरणों और फसल सुरक्षा नेट पर भी सब्सिडी मिलती है। कुल्लू जिले में 404 हेक्टेयर में जापानी फल की खेती हो रही है और इस साल 1406 मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। कुल्लू जिले में जापानी फल (परसीमन) की बागवानी का दायरा पिछले दो वर्षों में दोगुना हो गया है।

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साल 2023 तक लगभग 200 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होती थी, जबकि 2025 में यह बढ़कर 404 हेक्टेयर तक पहुंच गई है। बागवानी विभाग के अनुसार बढ़ती मांग के चलते किसान सरकारी नर्सरियों के साथ-साथ बाहरी नर्सरियों से भी पौधे खरीद रहे हैं। इस साल कुल्लू जिले में जापानी फल का उत्पादन 1406 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।

इस समय मिलते है जापानी के अच्छे दाम 

बागवानी विभाग का कहना है कि जापानी फल लगाने का सही समय जनवरी से शुरू होता है। फसल सितंबर से मंडियों में पहुंचने लगती है और वर्तमान में इसे अच्छे दाम मिल रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्रति हेक्टेयर 62,500 रुपए का अनुदान दिया जाता है। इसके अलावा, पावर टिलर और पावर स्प्रेयर पर 50 प्रतिशत और पक्षियों एवं ओलावृष्टि से बचाव के लिए जालीदार नेट पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

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इसमें नहीं होती है कीटनाशक  की जरुरत 

बागवानों के अनुसार इस साल जापानी फल के दाम 120 से 180 रुपए प्रति किलो तक मिल रहे है, जबकि बाहरी राज्यों में यह 200 से 400 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। बागवान दलीप सिंह के अनुसार, इस फल के लिए अधिक कीटनाशक या दवाईयों की जरूरत नहीं पड़ती, केवल चिड़ियों से बचाव की आवश्यकता है, वहीं, गवानी विशेषज्ञ डॉ. उत्तम पराशर कहते हैं कि जापानी फल का पेड़ कम देखभाल में भी अच्छा फल देता है। यह पेड़ थोड़ी ठंड भी सह लेता है और सेब जैसी जगहों पर आसानी से उगाया जा सकता है। पेड़ को बड़ा होने और फल देने में 4–5 साल लगते हैं।

जापानी फल सेहत के लिए है फायदेमंद

जापानी फल सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें विटामिन A, C, B1, B2, फोलेट और पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, फास्फोरस जैसे खनिज होते हैं। यह पाचन में मदद करता है, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखता है और आंखों के लिए भी अच्छा है।

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हिमाचल में उगाए जाते हैं दो प्रकार के जापानी फल

हिमाचल प्रदेश में मुख्य रूप से फुयु और हेचिया प्रजाति के जापानी फल उगाए जाते हैं, जिनमें फुयु की मांग सबसे ज्यादा है। कुल्लू जिले के लगघाटी, मणिकर्ण, गड़सा, बजौरा, झिड़ी और हुरला क्षेत्रों में इसका उत्पादन ज्यादा होता है। कुल मिलाकर कुल्लू जिले में लगभग 15,000 बागवान जापानी फल की खेती कर रहे हैं।

यह सेब लाता है मंडियों में नई रौनक

भुंतर सब्जी मंडी के व्यापारी चेतन कुमार और अमर सिंह बताते हैं कि सेब का सीजन खत्म होने के बाद जापानी फल की बिक्री बढ़ जाती है। इसकी मांग खासकर दक्षिणी राज्यों में ज्यादा है, और व्यापारी बागवानों से सीधे संपर्क कर उन्हें अच्छे दाम दे रहे हैं। कुल मिलाकर, जापानी फल ने कुल्लू जिले में बागवानों की आय बढ़ाने और मंडियों में नई रौनक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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