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February 22, 2026

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव संपन्न: चौहाटा में सजा देव दरबार, आदिब्रह्मा ने नगर की सुरक्षा को बांधा रक्षा सूत्र

मंडी की खुशहाली और बुरी आत्माओं से रक्षा के लिए देव आदिब्रह्मा ने बांधी कार

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Mandi Shivratri Festival

मंडी। सात दिन तक भक्ति और रौनक से सजी छोटी काशी अब फिर से अपने पुराने ढंग पर आ गई है। जो गलियां ढोल-नगाड़ों और जयकारों से गूंज रही थीं, वहां अब शांति है। लेकिन लोगों के दिलों में देवताओं के दर्शन और आशीर्वाद की यादें अभी भी ताजा हैं। जाते-जाते देवता सबको सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद देकर अपने-अपने धाम लौट गए, और पीछे छोड़ गए खूबसूरत यादें।

मंडी शिवरात्रि महोत्सव का हुआ समापन

बता दें कि मंडी जिले में सात दिन तक चली रौनक, भक्ति और उत्सव के बाद अंतरराष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि महोत्सव का समापन बेहद श्रद्धा और गरिमा के साथ हो गया। आखिरी दिन चौहाटा बाजार में भव्य देव दरबार सजा और जलेब में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा शहर भक्तिमय हो उठा।

 

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कार रक्षा सूत्र बांध हवा में उछाला जौ का आटा 

शहर की खुशहाली और बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए देव आदिब्रह्मा ने ‘कार’ बांधी। देवता के गूर ने रथ के साथ पूरे शहर की परिक्रमा की और समृद्धि की कामना की। इस दौरान देवलुओं ने जौ का आटा हवा में उछालकर वातावरण को और भी पवित्र और दिव्य बना दिया। चारों ओर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

सात दिन तक गूंजती रही छोटी काशी

पूरे हफ्ते मंडी शहर ढोल-नगाड़ों की थाप, शहनाइयों की मधुर धुन और “जय हो देव” के जयकारों से गूंजता रहा। दूर-दराज के गांवों से देवी-देवता अपने रथों और पालकियों में सजे-धजे यहां पहुंचे थे। हर दिन अलग ही नजारा देखने को मिला, लेकिन समापन दिवस की बात ही कुछ और थी।

 

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चौहाटा बाजार बना देवलोक

रविवार सुबह करीब छह बजे से ही चौहाटा बाजार में भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। आठ बजे तक उपायुक्त कार्यालय से लेकर बाबा भूतनाथ मंदिर  तक देवी-देवताओं का भव्य दरबार सज चुका था। ऐसा लग रहा था मानो धरती पर देवलोक उतर आया हो। श्रद्धालु अपने-अपने आराध्य देव के चरणों में शीश नवाते दिखे।

 

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कोई नारियल और चादर चढ़ा रहा था, तो कोई परिवार की सुख-शांति की मन्नत मांग रहा था। नवविवाहित जोड़े खुशहाल दांपत्य जीवन का आशीर्वाद लेने पहुंचे, वहीं छोटे बच्चों को कंधों पर उठाए माता-पिता उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते नजर आए। बुजुर्ग भी आस्था के साथ अपने देवों के दर्शन कर भावुक हो उठे।

पारंपरिक जातर के साथ विदाई

समापन पर पारंपरिक चौहटा जातर का आयोजन हुआ। इसके बाद दोपहर करीब दो बजे देवी-देवता अपने-अपने मूल स्थानों की ओर रवाना होने लगे। इस दौरान देव मिलन की भी सुंदर परंपरा निभाई गई।

 

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उपायुक्त एवं मेला कमेटी अध्यक्ष अपूर्व देवगन ने राज राजेश्वरी मंदिर  में पूजा-अर्चना कर सभी देवी-देवताओं को चादर और भेंट देकर ससम्मान विदा किया। माहौल भावुक भी था और भक्ति से भरा हुआ भी। 

बड़ा देव कमरूनाग का खास आकर्षण

दूसरे वर्ष सेरी चानणी में विराजमान होने पहुंचे बड़ा देव कमरूनाग भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। पिछले सात दिनों से वह माता टारना मंदिर  में विराजमान थे। रविवार सुबह सात बजे वहां से प्रस्थान कर नौ बजे सेरी चानणी पहुंचे।

 

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पुलिस ने संभाली भारी भीड़  

भारी भीड़ के चलते पुलिस को लोगों को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। करीब डेढ़ घंटे तक सीढ़ियों पर विराजमान रहकर बड़ा देव ने भक्तों को आशीर्वाद दिया और फिर साढ़े दस बजे वहां से अपने धाम के लिए रवाना हो गए। पिछले वर्ष वह सेरी चानणी में नहीं बैठे थे, इसलिए इस बार उनके आगमन से श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

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