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February 21, 2026
CM सुक्खू की बड़ी पहल- गरीब बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार, हर महीने देगी इतने पैसे
आर्थिक तंगी बनती है शिक्षा में रुकावट
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने गरीब और जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। CM सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हाल ही में इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना का विस्तार किया है। अब इस योजना के तहत विधवा महिलाओं की बेटियों को शिक्षा के लिए आर्थिक मदद दी जाएगी।
खास बात यह है कि अब ये मदद केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जो छात्राएं राज्य से बाहर उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती हैं, उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा। इसका मकसद है कि किसी भी परिस्थिति में आर्थिक तंगी उनके सपनों के रास्ते में बाधा न बने और हर लड़की को आगे बढ़ने का मौका मिले।
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CM ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य उन महिलाओं और बच्चों की मदद करना है जो किसी वजह से कमजोर स्थिति में हैं, जैसे कि विधवा, निराश्रित या तलाकशुदा महिलाएं और उनके बच्चे, या फिर ऐसे बच्चे जिनके अभिभावक दिव्यांग हैं। सरकार चाहती है कि इन बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में पूरा सहयोग मिले, ताकि वे आगे बढ़ सकें और अपना भविष्य संवार सकें।
योजना के तहत अब पात्र बेटियों को 27 साल की उम्र तक इसका लाभ मिलेगा। यानी अगर किसी लड़की की उम्र 27 साल तक है और वह पढ़ाई कर रही है, तो वह इस योजना का फायदा उठा सकती है। इससे पहले यह सुविधा केवल 18 साल तक की छात्राओं को मिलती थी, अब इसे बढ़ा दिया गया है।
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राज्य सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई छात्रा राज्य से बाहर किसी सरकारी संस्थान में व्यावसायिक कोर्स कर रही है, और उसके पास रहने के लिए हॉस्टल या छात्रावास की सुविधा नहीं है, तो उसे 10 महीने तक हर महीने 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
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यह राशि उसका किराया या पीजी/होस्टल का खर्चा पूरा करने में काम आएगी। इस वित्त वर्ष के लिए राज्य सरकार ने इस योजना के लिए कुल 31.01 करोड़ रुपये का बजट रखा है, और अब तक यानी 3 फरवरी 2026 तक लगभग 22.96 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
इस योजना के तहत कई तरह के कोर्स शामिल हैं, जैसे-
इसके अलावा, वर्तमान में योजना के अंतर्गत 18 साल तक की छात्राओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को भी मासिक वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके अलावा राज्य के सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राओं की ट्यूशन फीस, छात्रावास शुल्क और अन्य संबंधित शैक्षणिक खर्च भी सरकार वहन कर रही है।
इस प्रकार यह योजना उन लड़कियों और बच्चों के लिए एक बड़ा सहारा और सुरक्षा का जाल बन गई है, जो अपने परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ाई में आगे बढ़ने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। यह कदम समाज में समान अवसर देने और कमजोर वर्ग के बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।