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February 21, 2026
हिमाचल का ऐसा मंदिर, जहां आत्माओं का होता है हिसाब-किताब, स्वर्ग- नरक का भी होता है फैसला
मृत्यु के बाद यहां आती है आत्मा
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चंबा। कहते हैं कि मृत्यु के बाद हर आत्मा को यमराज के दरबार में जाना ही पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां लोग जीते-जी यमराज के दर्शन कर सकते हैं? जी हां, यह अनोखा और रहस्यमयी मंदिर हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित है। इस मंदिर को लेकर लोगों के मन में गहरी आस्था के साथ-साथ एक अलग तरह का डर भी है। कोई यहां श्रद्धा से सिर झुकाता है, तो कोई इसके नाम से ही घबरा जाता है। आखिर क्या है इस मंदिर की खासियत, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाती है।
यह मंदिर चंबा जिला के भरमौर क्षेत्र में स्थित है, जहां यमराज स्वयं विराजमान है। देखने में यह मंदिर किसी साधारण पहाड़ी घर जैसा लगता है। न तो यहां भव्य शिखर है और न ही बहुत बड़ी सजावट। लेकिन इसकी मान्यताएं इसे बेहद खास बना देती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो यमदूत उसकी आत्मा को सबसे पहले इसी स्थान पर लाते हैं। यहीं से उसके अगले सफर का फैसला होता है।
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मंदिर के अंदर एक कमरा चित्रगुप्त का बताया जाता है। मान्यता है कि यहां चित्रगुप्त आत्मा के जीवनभर के कर्मों का हिसाब-किताब पढ़ते हैं। कहा जाता है कि इंसान ने अपने जीवन में जो भी अच्छे या बुरे कर्म किए होते हैं, उनका पूरा लेखा-जोखा यहां सामने रखा जाता है। हालांकि कमरे में कोई मूर्ति नहीं है, फिर भी लोगों का विश्वास है कि यही वह स्थान है जहां आत्मा को उसके कर्मों के आधार पर परखा जाता है।
चित्रगुप्त के कमरे के सामने एक और कमरा है, जिसे यमराज की अदालत कहा जाता है। मान्यता है कि यहीं यमराज अंतिम फैसला सुनाते हैं , आत्मा को स्वर्ग भेजा जाए या नरक। लोगों का कहना है कि यह अदालत किसी भी इंसानी अदालत से ज्यादा गंभीर और रहस्यमयी है, क्योंकि यहां झूठ या सिफारिश नहीं चलती, केवल कर्मों का सच सामने आता है।
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मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता काफी दिलचस्प है। कहा जाता है कि मंदिर के चारों दिशाओं में चार दरवाजे हैं, जो अलग-अलग धातुओं- सोना, चांदी, तांबा और लोहा से बने माने जाते हैं। यह भी कहा जाता है कि आत्मा को उसके कर्मों के अनुसार किसी एक द्वार से बाहर ले जाया जाता है।
अच्छे कर्म करने वालों को स्वर्ण द्वार से स्वर्ग की ओर, जबकि बुरे कर्म करने वालों को लोहे के द्वार से नरक की ओर भेजा जाता है। इन मान्यताओं का जिक्र धार्मिक ग्रंथों, खासकर गरुड़ पुराण में भी बताया जाता है।
यही वजह है कि इस मंदिर को लेकर लोगों के मन में एक अलग तरह का सम्मान और डर दोनों मौजूद हैं। स्थानीय लोग मंदिर के पास से गुजरते समय सिर झुका लेते हैं, लेकिन भीतर जाने से बचते हैं। उनका मानना है कि यह स्थान इंसान को उसके कर्मों का एहसास दिलाता है।
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धरमराज मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह जीवन और मृत्यु के बीच के उस रहस्य का प्रतीक है, जिस पर इंसान सदियों से विचार करता आया है। यहां की मान्यताएं लोगों को यह संदेश भी देती हैं कि जीवन में अच्छे कर्म करना ही सबसे बड़ा धर्म है, क्योंकि अंत में फैसला कर्मों के आधार पर ही होता है।