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February 21, 2026
हिमाचल की धरती से जेपी नड्डा ने देश को दी बड़ी सौगात, लॉन्च की स्वदेशी "टीडी" वैक्सीन; जानें इसके फायदे
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने हिमाचल से किया स्वस्थ भारत का शंखनाद
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कसौली (सोलन)। देवभूमि हिमाचल प्रदेश ने एक बार फिर स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका सिद्ध करते हुए राष्ट्र को एक बड़ी सौगात दी है। शनिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोलन जिले के ऐतिहासिक केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (CRI) कसौली में स्वदेशी रूप से विकसित टीटनेस व एडल्ट डिफ्थीरिया (Td) वैक्सीन को लॉन्च किया। हिमाचल की इस उपलब्धि ने न केवल प्रदेश का मान बढ़ाया है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को भी नई ऊंचाई दी है। हिमाचल की धरती से शुरू हुई यह पहल भारत को स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत करती है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने टीडी वैक्सीन के 15 लाख डोज के पहले बैच को हरी झंडी दिखाकर बाजार में उतारने के लिए रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने गर्व के साथ कहा कि यह स्वदेशी वैक्सीन देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब दवाओं और वैक्सीन के निर्माण में विश्व का नेतृत्व (वर्ल्ड लीडर) कर रहा है, और इस सफलता की कहानी में 120 वर्षों के गौरवशाली इतिहास वाले CRI कसौली का विशेष योगदान है।
यह नई वैक्सीन विशेष रूप से किशोरों, वयस्कों और गर्भवती महिलाओं को टीटनेस और डिफ्थीरिया जैसे जानलेवा रोगों से सुरक्षा प्रदान करेगी। अभी तक उपयोग की जाने वाली टीटनेस टॉक्सॉइड (TT) वैक्सीन के स्थान पर अब Td वैक्सीन का उपयोग किया जाएगा। इसकी खासियत यह है कि यह टीटनेस के साथ-साथ डिफ्थीरिया के खिलाफ भी मजबूत प्रतिरक्षा सुनिश्चित करती है, जिससे अब एक ही टीके से दोहरी सुरक्षा मिल सकेगी।
नड्डा ने बताया कि हमारा यूनिवर्सल इम्युनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है। CRI कसौली द्वारा विकसित यह वैक्सीन अब इसी राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा बनेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि अप्रैल 2026 तक संस्थान द्वारा टीडी वैक्सीन के 55 लाख डोज उपलब्ध कराए जाएंगे। भविष्य में इसकी उत्पादन क्षमता को और अधिक विस्तार दिया जाएगा ताकि देश की बढ़ती जरूरतों को पूरा किया जा सके।
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करीब 120 वर्ष पुराने CRI कसौली ने देश में वैक्सीन निर्माण की परंपरा को मजबूत किया है। वर्तमान में संस्थान 11 प्रकार की वैक्सीन का उत्पादन कर रहा है। नड्डा ने संस्थान की क्षमता बढ़ाने की भी घोषणा की और कहा कि कर्मचारियों और अधिकारियों के सहयोग से CRI का दायरा और विस्तारित किया जाएगा।
इस मौके पर विशेषज्ञों ने बताया कि टीटनेस मिट्टी और धूल में मौजूद बैक्टीरिया से फैलता है, जो मांसपेशियों में जानलेवा ऐंठन पैदा करता है। वहीं डिफ्थीरिया गले और सांस की नली को प्रभावित करता है, जिससे पक्षाघात या मृत्यु तक हो सकती है। यह नई टीडी वैक्सीन इन दोनों बीमारियों के संक्रमण की कड़ी को तोड़ने और मृत्यु दर को कम करने में मील का पत्थर साबित होगी।
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कसौली की शांत वादियों से शुरू हुई यह स्वास्थ्य क्रांति न केवल हिमाचल बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। पहाड़ों की गोद से निकली यह पहल देश के करोड़ों नागरिकों को सुरक्षा कवच प्रदान करेगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में हिमाचल ने एक बार फिर साबित किया है कि संकल्प, समर्पण और वैज्ञानिक क्षमता के बल पर वह राष्ट्रीय विकास में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम है।