#धर्म
August 31, 2026
हिमाचल के मंदिरों में है अकूत दौलत! 30 मंदिरों में 6.25 क्विंटल सोना, 254 क्विंटल चांदी; करोड़ों का चढ़ावा
चिंतपूर्णी मंदिर में सबसे अधिक 2.17 क्विंटल सोना, नैना देवी में 2.10 क्विंटल सोना
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठों और मंदिरों में देश-विदेश से हर साल लाखों श्रद्धालु आस्था लेकर पहुंचते हैं। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार यहां सोना, चांदी और नकदी चढ़ाते हैं। अब मंदिरों में जमा इस चढ़ावे के आंकड़े सामने आए हैं, जो हैरान करने वाले हैं।
हिमाचल प्रदेश के 30 प्रमुख मंदिरों में 6 क्विंटल 25 किलो से अधिक सोना और 254 क्विंटल से ज्यादा चांदी जमा है। दिसंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मंदिरों में जमा सोने की मात्रा 6 क्विंटल 25 किलो 843 ग्राम और चांदी की मात्रा 254 क्विंटल 69 किलो 129 ग्राम पहुंच चुकी थी। मौजूदा बाजार कीमतों के आधार पर केवल सोने की कीमत ही करीब 958 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से लगातार सोना और चांदी चढ़ाई जा रही है। वर्ष 2025 के दौरान ही इन मंदिरों को 10.858 किलो सोना और 9.15 क्विंटल से अधिक चांदी चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुई। आंकड़े बताते हैं कि हिमाचल के मंदिर सिर्फ आस्था के बड़े केंद्र ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की भारी आस्था के चलते बहुमूल्य धातुओं के बड़े भंडार भी बन चुके हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: किसान पिता की मेहनत लाई रंग, बेटा-बेटी ने एक साथ UGC-NET में लहराया परचम
प्रदेश के मंदिरों में सोने के भंडार की बात करें तो ऊना का प्रसिद्ध चिंतपूर्णी मंदिर सबसे आगे है। मंदिर प्रबंधन के पास करीब 2.17 क्विंटल सोना जमा है। इसके अलावा यहां करीब 82 क्विंटल चांदी भी श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई जा चुकी है। सोने और चांदी के इस विशाल भंडार से अंदाजा लगाया जा सकता है कि चिंतपूर्णी मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था कितनी गहरी है।
बिलासपुर का प्रसिद्ध नैना देवी मंदिर भी बहुमूल्य चढ़ावे के मामले में पीछे नहीं है। मंदिर में करीब 2.10 क्विंटल सोना और लगभग 89.35 क्विंटल चांदी जमा है। प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल इस मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार चढ़ावा अर्पित करते हैं।
यह भी पढ़ें : कर्मचारियों-पेंशनरों के लिए बड़ी खबर: जल्द मिलेगा DA और 35% एरियर; सीएम सुक्खू ने किया ऐलान
कांगड़ा के प्रसिद्ध ज्वालाजी मंदिर में करीब 50 किलो सोना और 20 क्विंटल से अधिक चांदी जमा है। वहीं बज्रेश्वरी देवी मंदिर में लगभग 37 किलो सोना और 15.45 क्विंटल चांदी श्रद्धालुओं ने चढ़ाई है। हमीरपुर के प्रसिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में भी करीब 30 किलो सोना और 3.82 क्विंटल चांदी जमा है। सिरमौर के माता बालासुंदरी मंदिर में 18 किलो सोना और 29.71 क्विंटल चांदी है, जबकि कांगड़ा के चामुंडा देवी मंदिर में करीब 20 किलो सोना और 7.82 क्विंटल चांदी श्रद्धालुओं ने अर्पित की है।
हिमाचल प्रदेश सरकार के अधीन 36 मंदिर हैं, जिनका प्रबंधन सरकार द्वारा किया जाता है। इन मंदिरों में पिछले तीन वर्षों के दौरान श्रद्धालुओं ने 419.88 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा चढ़ाया है। हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया के सवाल के जवाब में सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में मंदिरों को 153.32 करोड़ रुपये, वर्ष 2025 में 157.51 करोड़ रुपये और वर्ष 2026 में 1 अगस्त तक 109.04 करोड़ रुपये चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुए।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में बिना बारिश दरका पहाड़, भूस्खलन से 200 मीटर सड़क का मिट गया नामोनिशान; मचा हड़कंप
तीन साल के आंकड़ों में सबसे ज्यादा चढ़ावा हमीरपुर के बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध को मिला। मंदिर में श्रद्धालुओं ने कुल 99.19 करोड़ रुपये अर्पित किए। इसके बाद बिलासपुर के नैना देवी मंदिर को 86.94 करोड़ रुपये और ज्वालामुखी मंदिर को 36.57 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ। वहीं सिरमौर के महामाया बाला सुंदरी मंदिर को 26.99 करोड़ रुपये, कांगड़ा के बज्रेश्वरी देवी मंदिर को 13.76 करोड़ रुपये, चामुंडा नंदिकेश्वर मंदिर एवं आदि हिमानी समूह को 11.68 करोड़ रुपये और शिमला के जाखू हनुमान मंदिर को 8.82 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला।
यह भी पढ़ें : हिमाचल विधानसभा में उठेगा मंजू शर्मा मौ*त मामला- डॉक्टरों पर आरोप, विपक्ष के निशाने पर सरकार
मंदिरों में आने वाले इस चढ़ावे का इस्तेमाल निर्धारित नियमों के तहत किया जाता है। हिमाचल प्रदेश हिंदू सार्वजनिक धार्मिक संस्था एवं पूर्त विन्यास अधिनियम, 1984 के प्रावधानों के अनुसार मंदिरों की आय को धार्मिक और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों पर खर्च किया जाता है। इस राशि से मंदिरों और तीर्थस्थलों का विकास, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं, कर्मचारियों के वेतन, पेयजल, बिजली, सुरक्षा और रखरखाव जैसे कार्य किए जाते हैं। इसके अलावा मंदिर परिसरों की सफाई, शौचालय, पार्किंग, स्ट्रीट लाइट, लंगर, गौशालाओं, शिक्षण संस्थानों और धार्मिक आयोजनों सहित मेलों के आयोजन पर भी इस धनराशि का इस्तेमाल किया जाता है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: डॉक्टरों की मनमानी पर सरकार का डंडा- मनचाही पोस्टिंग बंद, शहर से बाहर देनी होगी ज्वाइनिंग
हिमाचल के मंदिरों में जमा सोने-चांदी और करोड़ों रुपये के चढ़ावे के आंकड़े प्रदेश की धार्मिक आस्था की विशालता को दिखाते हैं। एक तरफ श्रद्धालु अपनी श्रद्धा से लगातार चढ़ावा अर्पित कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ इस संपदा के सुरक्षित प्रबंधन और मंदिरों से जुड़े विकास कार्यों में इसके उचित इस्तेमाल की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
देवभूमि हिमाचल के मंदिरों में जमा यह अकूत संपदा आखिरकार लाखों श्रद्धालुओं की आस्था की तस्वीर है—जहां पहाड़ों की चोटियों पर बसे देवस्थलों में हर साल करोड़ों रुपये के साथ सोना-चांदी भी श्रद्धा के रूप में अर्पित किया जाता है।