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February 21, 2026

सुक्खू सरकार के दिल्ली दौरे ने बढ़ाई हलचल, राज्यसभा सीट में जुड़ा चौथा नाम; छोड़ना होगा मंत्री पद

प्रतिभा सिंह, आनंद शर्मा और रजनी पाटिल के बाद अब एक और नाम जुड़ा

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himachal Congress

शिमला। हिमाचल प्रदेश की पूरी कांग्रेस सरकार के दिल्ली दौरे ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और कैबिनेट मंत्रियों की राजधानी में हुई बैठकों के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा राज्यसभा चुनाव को लेकर हो रही है। खास बात यह है कि दिल्ली में मंथन के दौरान राज्यसभा सीट के लिए एक और नाम जुड़ गया है। पहले जहां तीन दावेदार माने जा रहे थे, वहीं अब चौथे नाम की एंट्री से सियासी समीकरण और रोचक हो गए हैं।

तीन से चार हुए दावेदार

अब तक राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल के नाम प्रमुखता से चर्चा में थे। लेकिन दिल्ली में हुई बैठकों के बाद स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल हो गया है। इससे दावेदारों की संख्या तीन से बढ़कर चार हो गई है और कांग्रेस खेमे में अंदरूनी गणित तेज हो गया है।

 

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कैबिनेट संतुलन की रणनीति भी अहम

माना जा रहा है कि यदि धनीराम शांडिल को राज्यसभा भेजा जाता है तो इससे कैबिनेट में क्षेत्रीय संतुलन साधने का रास्ता भी खुल सकता है। शिमला संसदीय क्षेत्र से मंत्रियों की संख्या अधिक होने के कारण सत्ता संतुलन पर चर्चा पहले से चल रही है। ऐसे में राज्यसभा का फैसला सिर्फ संसदीय प्रतिनिधित्व का नहीं, बल्कि संगठन और सरकार के अंदरूनी समीकरणों का भी मुद्दा बन गया है।

आनंद शर्मा और प्रतिभा सिंह मजबूत दावेदार

अनुभवी नेता आनंद शर्मा को अब भी इस रेस में आगे माना जा रहा है। वे हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में हुई बैठक में शामिल हुए थे। वहीं] छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत का प्रतिनिधित्व कर रहीं प्रतिभा सिंह भी मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक] वे भी जल्द दिल्ली जाकर अपनी दावेदारी पेश कर सकती हैं।

 

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बाहरी बनाम स्थानीय की बहस फिर गर्म

राज्यसभा चुनाव से पहले ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ का मुद्दा फिर से चर्चा में है। पिछली बार कांग्रेस को बहुमत के बावजूद हार का सामना करना पड़ा था, जब क्रॉस वोटिंग ने पार्टी की रणनीति पर पानी फेर दिया था। इस बार पार्टी नेतृत्व फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। यदि गैर-हिमाचली चेहरा उम्मीदवार बनाया जाता है तो भाजपा द्वारा प्रत्याशी उतारने की संभावना बढ़ सकती है।

 

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भाजपा की नजर कांग्रेस के फैसले पर

भाजपा फिलहाल प्रतीक्षा की रणनीति पर है। पार्टी कांग्रेस के उम्मीदवार की घोषणा के बाद ही अपनी चाल चलने के संकेत दे रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव कांग्रेस के लिए साख की परीक्षा भी होगा, क्योंकि बहुमत के बावजूद पिछली हार की स्मृति अभी ताजा है।

 

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हाईकमान के पाले में अंतिम फैसला

फिलहाल प्रदेश कांग्रेस ने अंतिम निर्णय का अधिकार हाईकमान पर छोड़ रखा है। 16 मार्च को प्रस्तावित चुनाव से पहले उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगनी है। दिल्ली दौरे के बाद बढ़ी हलचल ने साफ कर दिया है कि यह चुनाव सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि हिमाचल की सियासी दिशा तय करने वाला मुकाबला बन सकता है।

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