#राजनीति
August 28, 2025
आपदा पर मुकेश-जयराम में तीखी नोकझोंक, विपक्ष ने की सत्र स्थगित करने की मांग
मुकेश बोले-आपदा को राजनीतिक पालने में झुला रहे जयराम
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शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को चंबा जिले में आई प्राकृतिक आपदा को लेकर जोरदार बहस और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया और सत्र को स्थगित करने की मांग की, जबकि सत्तापक्ष ने बचाव और राहत कार्यों को लेकर किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर आपदा को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।
भाजपा विधायक हंसराज ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के तहत चंबा जिले के चुराह और भरमौर क्षेत्र की गंभीर स्थिति को सदन के समक्ष रखा। उन्होंने बताया कि भारी बारिश और भूस्खलन के कारण इन क्षेत्रों में दूरसंचार और सड़क संपर्क पूरी तरह कट चुका है। राहत सामग्री की आपूर्ति बाधित हो गई है और कई गांवों में लोग फंसे हुए हैं। भाजपा विधायक जनक राज सहित विपक्षी सदस्यों ने इसे अत्यंत गंभीर स्थिति बताते हुए विधानसभा सत्र को तत्काल स्थगित करने की मांग की।
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नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब राज्य आपदा से जूझ रहा है, तब मुख्यमंत्री बिहार में राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। यह प्रदेश के लोगों के साथ अन्याय है। मुख्यमंत्री को इस वक्त राज्य में रहकर राहत कार्यों की निगरानी करनी चाहिए थी। जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता जनता नहीं, बल्कि राजनीति बन गई है।
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विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार आपदा को लेकर पूरी तरह गंभीर है और लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव ने सभी जिलों के उपायुक्तों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। चंबा-पठानकोट मार्ग बुधवार रात एक बजे खोल दिया गया है।
उन्होंने विपक्ष के 10,000 लोगों के फंसे होने के दावे को गलत बताते हुए कहा कि केवल 3,000 लोग फंसे थे, जिनमें से सभी को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। मुकेश अग्निहोत्री ने नेता प्रतिपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष इस गंभीर विषय को राजनीतिक पालने में झुला रहा है। यह वक्त एकजुट होकर राहत कार्यों में सहयोग देने का है, न कि आरोप.प्रत्यारोप करने का।
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उप मुख्यमंत्री के बयान के बाद सदन में तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। विपक्षी विधायक अपनी सीटों पर खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सत्ता पक्ष के विधायक भी जवाब में खड़े हो गए, जिससे सदन का माहौल गर्मा गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया ने सदन में सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि हम सभी पहले जनप्रतिनिधि हैं, फिर मंत्री, नेता या अध्यक्ष। यदि कोई विधायक अपने क्षेत्र में जाकर आपदा राहत में सहयोग करना चाहता है, तो जा सकता है। उन्होंने सत्तापक्ष के आग्रह पर यह भी कहा कि जब तक सभी पक्ष सहमत न हों, सत्र स्थगित करना संभव नहीं है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन में लंबित हैं।
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प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने राज्य सरकार द्वारा वसूले जा रहे विभिन्न प्रकार के सेस पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कोविड समाप्त हो चुका है, फिर भी कोविड सेस क्यों लिया जा रहा है? इस पर सत्ता पक्ष की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया, लेकिन इस मुद्दे पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा।