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August 28, 2025

सदन में हिमाचल की तबाही को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग, विपक्ष ने भी किया समर्थन

विक्रमादित्य सिंह बोले केंद्र से मिला सहयोग, हिमाचल में तबाही के बताए ये कारण

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Manson session himachal

शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने तबाही मचा दी है। पूरे प्रदेश में हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि वीरवार को विधानसभा में मानसून आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग को लेकर सरकार ने बाकायदा प्रस्ताव पेश किया। यह प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने नियम 102 के तहत सदन में रखा, जिसे विपक्ष ने भी पूर्ण समर्थन दिया।

 

सरकारी आकलन के अनुसार अब तक प्रदेश में 3,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। निजी और सरकारी संपत्तियां तबाह हो गई हैं, सैकड़ों लोगों की जानें गई हैं और हजारों परिवार बेघर हुए हैं। ऐसे में केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग को लेकर यह प्रस्ताव अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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विपक्ष और सरकार एक मंच पर

इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष में अभूतपूर्व सहमति देखने को मिली। विपक्ष ने न केवल प्रस्ताव का समर्थन किया, बल्कि इस आपदा को लेकर सरकार से जल्द राहत कार्य तेज़ करने की भी मांग की। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करते हुए कहा कि प्रदेश में आई आपदा अब केवल एक साल की घटना नहीं, बल्कि बीते कई वर्षों से हो रहे जलवायु परिवर्तन और असंतुलित विकास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पहले आपदाएं पुराने हिमाचल तक सीमित थीं, अब पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले चुकी हैं। इससे निपटने के लिए हमें दीर्घकालिक योजनाएं बनानी होंगी।

 

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पहाड़ों के अंधाधुंध दोहन पर सवाल

विक्रमादित्य सिंह ने विकास के नाम पर हो रहे अंधाधुंध निर्माण और पहाड़ों के कटाव को मौजूदा हालात के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अब सड़कों को पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि सुरंग माध्यम से बनाया जाना चाहिए ताकि पहाड़ी ढांचे को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने ढली से रामपुर तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क को सुरंग माध्यम से बनाने की मांग भी केंद्र सरकार से की है।

केंद्र से पहले भी मिला सहयोग, फिर भी मांगें अधूरी

विक्रमादित्य सिंह ने यह भी माना कि 2023 की भीषण आपदा के समय केंद्र से कुछ राहत जरूर मिली थी, लेकिन इस बार की तबाही और व्यापकता को देखते हुए, इसे केवल राज्य का मामला नहीं माना जा सकता।

 

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सदन में सीएम की गैरमौजूदगी पर हंगामा

इस बीचए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की विधानसभा सत्र के दौरान गैरहाजिरी ने विपक्ष को हमलावर बना दिया। भाजपा विधायक हंसराज ने चंबा जिले की गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए सीएम की गैरमौजूदगी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि जब राज्य प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है, उस वक्त सीएम का बिहार में राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

 

विपक्षी विधायकों ने मानसून सत्र को स्थगित करने की मांग भी उठाई, ताकि राहत कार्यों में पूरा ध्यान लगाया जा सके। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि अगर सरकार और विपक्ष आपसी सहमति से सत्र स्थगन चाहते हैं तो वे इसके लिए तैयार हैं। वहीं उन्होंने यह भी कहा कि जो विधायक अपने अपने क्षेत्र में आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने के लिए जाना चाहता है, वह जा सकते हैं।

क्या घोषित होगी राष्ट्रीय आपदा?

अब नजरें केंद्र सरकार पर टिकी हैं। अगर हिमाचल की इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाता हैए तो न केवल विशेष आर्थिक पैकेज मिलेगाए बल्कि पुनर्निर्माण कार्यों में केंद्र की प्रत्यक्ष भूमिका भी सुनिश्चित होगी। राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव को केंद्र को भेजने की तैयारी कर ली है। यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र इस प्रस्ताव पर कब और क्या निर्णय लेता है।

भयावह आंकड़े: जान-माल का भारी नुकसान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक मानसून सीजन में:

  • 310 लोगों की मौत

  • 720 घर पूरी तरह ध्वस्त

  • 2,669 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त

  • 82 जगह भूस्खलन, 90 स्थानों पर बाढ़, 41 बार बादल फटने की घटनाएं

  • 2500 करोड़ रुपये से ज्यादा की निजी व सरकारी संपत्ति नष्ट

  • लोक निर्माण विभाग को 1444 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान

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