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August 28, 2025

आपदा में विक्रमादित्य के विभाग को 1444 करोड़ का नुकसान, 73 पुल - 6 हजार KM सड़क तबाह

भारी बारिश से आई प्राकृतिक आपदा में सबसे अधिक हुआ पीडब्ल्यूडी को नुकसान

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शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस बार भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा ने भयंकर तबाही मचाई है। इस मानसून सीजन भारी बारिश से आई प्राकृतिक आपदा में अब तक सैंकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके है। वहीं हजारों करोड़ की संपत्ति नष्ट हो चुकी है। सबसे अधिक नुकसान हिमाचल लोक निर्माण विभाग को हुआ है। जिसमें सैंकड़ों सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई, वहीं 70 से अधिक पुल टूट चुके हैं। 

पीडल्ब्ल्यूडी को इस मानसून अब तक 1444 करोड़ का नुकसान

पिछले तीन दिन 24 से 26 अगस्त के बीच ही मूसलधार बारिश ने राज्य में व्यापक तबाही मचाई है। सड़कों के टूटने, पुलों के बह जाने और भूस्खलनों के चलते जनजीवन पूरी तरह अस्त.व्यस्त हो गया है। प्रदेश में मानसून की एंट्री 20 जून को हुई थी, और तब से लेकर अब तक बारिश से हुए नुकसान का आंकड़ा लोक निर्माण विभाग के अनुसार 1444 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है।

 

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मात्र तीन दिन में158 करोड़ का हुआ नुकसान

विधानसभा के मानसून सत्र के आठवें दिन पीडब्ल्यूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने हालात की गंभीरता को लेकर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केवल 24 से 26 अगस्त की बारिश से ही राज्य में 158 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है। इस दौरान 1091 सड़कें क्षतिग्रस्त, 7 पुल टूटे और 2 पुल तेज बहाव में बह गए। उन्होंने बताया कि वर्तमान मानसून सीजन में अब तक 5667 किलोमीटर सड़कें, 34 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग, और 70 से अधिक पुल पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

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900 से अधिक मशीनें बहाली में जुटी, फिर भी नहीं सुधर रहे हालात

भारी बारिश से मची तबाही के बाद लोक निर्माण विभाग ने तुरंत राहत और पुनर्निर्माण के प्रयास तेज कर दिए हैं। विभाग की ओर से 912 मशीनों को बहाली कार्य में लगाया गया है, जिनमें  161 जेसीबी, 43 डोजर, 11 सरकारी टिप्पर, 462 निजी जेसीबी, 120 निजी टिप्पर शामिल हैं। इसके बावजूद कई इलाकों में सड़क संपर्क पूरी तरह ठप पड़ा है और आवागमन संभव नहीं हो पा रहा है।

कुल्लू और मनाली सबसे अधिक प्रभावित

विक्रमादित्य सिंह ने सदन में बताया कि कुल्लू जिले में भारी बारिश के कारण अब तक 30 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। पुरानी मनाली को जोड़ने वाला 27.5 मीटर लंबा मनालसु स्टील पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। मंत्री ने बताया कि इस समय केवल रायसन पुल ही कुल्लू और मनाली के बीच संपर्क बना रहा है। मनालसु पुल के पुनर्निर्माण और संपर्क मार्ग को ठीक करने के लिए 15 करोड़ रुपये की जरूरत है। वहीं, भूतनाथ पुल का 50 मीटर लंबा संपर्क मार्ग बह गया है] जिसके लिए 60 लाख रुपये की आवश्यकता बताई गई है।

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कांगड़ा और चंबा में भी भारी तबाही

कांगड़ा जिला भी बारिश से अछूता नहीं रहा। यहां 30 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की पुष्टि हुई है। चंबा जिले के डलहौजी क्षेत्र में ही 25 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। जिले की 234 सड़कें अभी भी बंद हैं और भरमौर, सलूणी, तीसा, चंबा और किलाड़ मंडलों का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कटा हुआ है।

लग घाटी और पहाल्लाह घाटी तबाही के केंद्र

कुल्लू विधानसभा क्षेत्र की लग घाटी और पहाल्लाह घाटी सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां अधिकांश सड़कें, पुल और पुलिया पूरी तरह बह गए हैं। इन दो घाटियों में अनुमानित नुकसान 9 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।

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राज्य सरकार राहत कार्यों में जुटी, लेकिन चुनौती बड़ी

PWD मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार राहत व पुनर्निर्माण कार्यों में कोई कोताही नहीं बरत रही है, परंतु लगातार हो रही बारिश और पहाड़ी इलाकों में हो रहे भूस्खलन कार्य में बड़ी बाधा बन रहे हैं। मंत्री ने केंद्र सरकार से आपदा राहत के लिए विशेष पैकेज की मांग भी दोहराई।

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