#राजनीति
February 4, 2026
80 साल से मिल रहा पैसा- मोदी सरकार ने किया बंद : नाराज CM सुक्खू ने लिया बड़ा फैसला
ग्रांट बंद करने से हिमाचल को बड़ा नुकसान
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शिमला। केंद्रीय बजट में मोदी सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश समेत अन्य पहाड़ी राज्यों की रेवेन्यू डिफेसिट ग्रांट (RDG) बंद किए जाने से प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा है। इस फैसले से हिमाचल प्रदेश को लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। अब इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में बड़ा और अहम ऐलान किया है।
CM सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से उत्पन्न स्थिति की भरपाई के लिए प्रदेश सरकार हिमाचल की भूमि पर स्थापित सभी जल विद्युत परियोजनाओं पर भूमि कर (लैंड टैक्स) लगाने का फैसला कर रही है। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए 8 फरवरी को कैबिनेट बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस निर्णय को मंजूरी दी जाएगी।
रेवेन्यू डिफेसिट ग्रांट बंद होने के बाद हिमाचल सरकार के सामने वेतन, पेंशन, विकास कार्यों और बुनियादी सेवाओं के संचालन को लेकर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। CM सुक्खू ने माना कि यह फैसला प्रदेश के लिए अप्रत्याशित और चिंताजनक है।
इसी कड़ी में CM सुक्खू ने कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाने का भी ऐलान किया है, जिसकी तारीख जल्द तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर भाजपा विधायक दल को भी बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा।
CM सुक्खू के अनुसार, यह विषय राजनीति से ऊपर उठकर सोचने का है और प्रदेश हित में सभी दलों को एकजुट होना चाहिए। CM ने बताया कि RDG बंद होने से बनी स्थिति को लेकर सभी विधायकों को प्रदेश की वित्तीय हालत पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दी जाएगी- ताकि हर जनप्रतिनिधि वास्तविक हालात को समझ सके और सामूहिक रूप से समाधान निकाला जा सके।
CM सुक्खू ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजस्व घाटा अनुदान कोई कृपा नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अनुदान है, जो हिमाचल प्रदेश को 1952 से लगातार मिल रहा था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच हिमाचल को करीब 48 हजार करोड़ रुपये आरडीजी के रूप में प्राप्त हुए।
CM सुक्खू ने कहा कि इस तरह अचानक इस अनुदान को बंद किया जाएगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। इससे साफ है कि केंद्र सरकार ने पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों को नजरअंदाज किया है।
प्रदेश की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने अब हिमाचल की भूमि पर स्थापित जल विद्युत परियोजनाओं से कर वसूली का रास्ता चुना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे राज्य को स्थायी राजस्व स्रोत मिलेगा और वित्तीय स्थिति को कुछ हद तक संभालने में मदद मिलेगी।
CM सुक्खू ने GST व्यवस्था पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) का सबसे अधिक फायदा बड़े और मैदानी राज्यों को हुआ है, जबकि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों को इससे नुकसान उठाना पड़ा है। सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हिमाचल को बराबरी का लाभ नहीं मिल पाया।
हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर पर सीधा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे प्रदेश की जनता के सामने यह स्पष्ट करें कि वे आरडीजी बंद करने के पक्ष में हैं या इसके विरोध में। CM ने कहा कि यह मुद्दा राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रदेश के अस्तित्व और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
भाजपा नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल को मैदानी राज्यों की श्रेणी में रखना पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की 68 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र में आती है, करीब 28 प्रतिशत फॉरेस्ट कवर है और यहां से पांच प्रमुख नदियां निकलती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास करता है और ऐसे पहाड़ी राज्य के लिए राजस्व घाटा अनुदान जीवनरेखा के समान है। आरडीजी बंद होने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर सीधा और गहरा असर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यदि केंद्र सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती है, तो प्रदेश की जनता को भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा। यह केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल की लड़ाई है।