#विविध
February 4, 2026
हिमाचल : समाज ने खूब टोका, नहीं रुकी निर्मला- बिजली बोर्ड में लाइनमैन बन दे रही सेवाएं
परिवार का सहयोग बना निर्मला के लिए मजबूत आधार
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चंबा। एक दौर था जब बहू-बेटियां घर की चार दीवारी में रहती थी। मगर अब आज के दौर बेटियां हर क्षेत्र में बेटों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चल रही हैं। हिमाचल के चंबा जिला की बेटी ने ये साबित कर दिखाया है कि औरत अगर कुछ करने का ठान ले तो उसे किसी के सहारे की जरूरत नहीं होती।
चंबा जिले में बिजली बोर्ड में तैनात निर्मला कुमारी ने अपने जज्बे, मेहनत और आत्मविश्वास से यह साबित कर दिया है। उनकी कहानी केवल एक नौकरी या पद की नहीं है, बल्कि उस सोच को तोड़ने की है जो आज भी कुछ पेशों को “सिर्फ पुरुषों का काम” मानकर चलती है।
हरदासपुरा क्षेत्र में सहायक लाइनमैन, ALM के पद पर कार्यरत निर्मला कुमारी आज उस जिम्मेदारी को निभा रही हैं, जिसे आमतौर पर जोखिम भरा और पुरुष प्रधान माना जाता है। निर्मला के हौंसले को देखकर हर कोई उन्हें सलाम करता है।
बिजली के खंभों पर चढ़कर फॉल्ट ठीक करना, तेज बारिश या ठंड में उलझी तारों को दुरुस्त करना, अचानक आई तकनीकी खराबी को समय रहते ठीक करना-ये सभी काम निर्मला पूरे साहस के साथ करती हैं। उनके लिए अब यह सब रोजमर्रा की जिम्मेदारी बन चुकी है।
निर्मला मानती हैं कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होती। उपभोक्ताओं की शिकायतें हों या अचानक बिजली बाधित होने की स्थिति, वे हर समस्या को गंभीरता से लेती हैं। उनका कहना है कि लोगों को समय पर राहत देना और उन्हें संतुष्ट करना ही उनके काम की असली कसौटी है। यही वजह है कि क्षेत्र में उपभोक्ता भी उनके काम की सराहना करते हैं।
बिजली बोर्ड में 24 घंटे की ड्यूटी तीन शिफ्टों में बंटी होती है-सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक, दोपहर 3 बजे से रात 11 बजे तक और रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक। निर्मला इन सभी शिफ्टों में पूरी मुस्तैदी से काम करती हैं।
इसके अलावा ऑन कॉल सेवाओं के तहत किसी भी समय बुलाए जाने पर वे बिना हिचक तैयार रहती हैं। उनका कहना है कि जिम्मेदारी निभाने के लिए समय या परिस्थितियों का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
2018-19 बैच में भर्ती होने के बाद निर्मला ने केवल आसान क्षेत्रों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने पांगी, मरेडी और सरोल जैसे दुर्गम इलाकों में भी सेवाएं दी हैं। विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्र पांगी में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं होता। भारी बर्फबारी, कड़ाके की ठंड और सीमित संसाधनों के बीच बिजली आपूर्ति बहाल करना अनुभवी कर्मचारियों के लिए भी कठिन साबित होता है। इसके बावजूद निर्मला ने वहां भी अपने साहस और तकनीकी ज्ञान से काम कर दिखाया।
निर्मला का यह सफर आसान नहीं रहा। जब उन्होंने आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में दाखिला लिया, तो कई लोगों ने सवाल उठाए। सहपाठी लड़कों ने ताने मारे कि यह काम लड़कियों के बस का नहीं है। लेकिन शिक्षकों का मार्गदर्शन, परिवार का समर्थन और खुद पर भरोसा निर्मला की सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने आलोचनाओं को नजरअंदाज करते हुए अपनी मेहनत पर ध्यान दिया और आज वही लोग उनके काम की मिसाल देते हैं।
निर्मला बताती हैं कि बचपन से ही कुछ अलग करने का जज़्बा उनके भीतर था। इस रास्ते पर चलने में उनके माता-पिता और भाई-बहनों ने हर कदम पर उनका साथ दिया। परिवार का यही विश्वास उन्हें हर मुश्किल परिस्थिति में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।
आज निर्मला कुमारी सिर्फ बिजली बोर्ड की कर्मचारी नहीं, बल्कि उन तमाम लड़कियों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं जो सामाजिक बंधनों या असफलता के डर से अपने सपनों को दबा देती हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि हौसला बुलंद हो और मेहनत सच्ची हो तो बेटियां किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। चम्बा की यह जांबाज़ महिला आज न सिर्फ बिजली के तार जोड़ रही हैं, बल्कि समाज की पुरानी सोच को भी झटके दे रही हैं।