#राजनीति
March 5, 2026
राज्यसभा चुनाव: पहले वीरभद्र अब सुक्खू के करीबी हैं अनुराग, कांग्रेस का एक गुट नाराज- BJP में हलचल
दिग्गजों को पीछे छोड़ युवा नेता अनुराग शर्मा को मिला राज्यसभा का मौका
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शिमला। हिमाचल की सियासत में कांग्रेस ने ऐसा फैसला लिया है जिसने कई राजनीतिक कयासों को एक झटके में पलट दिया। राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी ने कांगड़ा के युवा नेता अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाकर सबको चौंका दिया है। जिन नामों की चर्चा लंबे समय से चल रही थी, उन्हें पीछे छोड़ते हुए हाईकमान ने संगठन से जुड़े चेहरे पर भरोसा जताया है।
कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए देश के पांच राज्यों से कुल छह उम्मीदवारों की सूची जारी की है। इसी सूची में हिमाचल प्रदेश से कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनुराग शर्मा का नाम शामिल किया गया है। उनके नाम की घोषणा के साथ ही प्रदेश कांग्रेस संगठन में नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
अनुराग शर्मा आज विधानसभा परिसर में रिटर्निंग ऑफिसर और विधानसभा सचिव के समक्ष अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस के विधायक भी मौजूद रहेंगे। नामांकन से पहले मुख्यमंत्री विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की बैठक भी करेंगे।
बता दें कि अनुराग शर्मा का पिछले कल ही जन्मदिन था। ऐसे में जन्मदिन के अलगे ही दिन उनका नाम राज्यसभा सीट के उम्मीदवार की लिस्ट में आ गया है। जिसके बाद से उनके समर्थकों में खुशी की लहर है। वहीं, सीएम सुक्खू ने भी सोशल मीडिया पर अनुराग शर्मा को बधाई दी है।
अनुराग शर्मा हिमाचल की राजनीति में उभरते हुए युवा चेहरे माने जाते हैं। उनकी राजनीतिक सक्रियता की शुरुआत 1990 के दशक में छात्र राजनीति से हुई थी, जिसके बाद वे कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे। कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले अनुराग शर्मा पेशे से कारोबारी हैं और हाल ही में उन्हें कांगड़ा जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था।
राजनीतिक पृष्ठभूमि उनके परिवार से भी जुड़ी रही है। उनके पिता प्यारे लाल शर्मा बीड़ ग्राम पंचायत से छह बार प्रधान रह चुके हैं और एक बार पंचायत समिति के अध्यक्ष भी रहे। वे पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी माने जाते थे और वीरभद्र सिंह के बैजनाथ दौरे के दौरान अक्सर उनके घर ठहरते थे।

अनुराग शर्मा खेल गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं। वे बीड़-बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं और इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग गतिविधियों से उनका जुड़ाव रहा है। पारिवारिक स्तर पर उनका संबंध पूर्व मंत्री संतराम शर्मा के परिवार से भी बताया जाता है, जो वर्तमान में भाजपा में शामिल हो चुके नेता सुधीर शर्मा के पिता थे।
अनुराग शर्मा लंबे समय से मुख्यमंत्री सुक्खू के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय रहने के साथ-साथ वे इंटरनेशनल बीड़ बिलिंग पैरा ग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैरा ग्लाइडिंग प्रतियोगिताओं के आयोजन से जुड़ी संस्था है।
अनुराग शर्मा को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर एक संकेत साफ माना जा रहा है। इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि हिमाचल में अब कांग्रेस की कमान CM सुखविंदर सिंह सुक्खू के हाथों में ही सबसे मजबूत मानी जा रही है। पार्टी हाईकमान ने भी उनके सुझाव को स्वीकार करते हुए उसी दिशा में निर्णय लिया है।
अनुराग शर्मा को CM सुक्खू का करीबी माना जाता है। राज्यसभा टिकट को लेकर कई बड़े और वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में थे, जिनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा जैसे चेहरे भी शामिल थे। इसके बावजूद अंत में युवा और संगठन से जुड़े नेता को मौका दिया गया।
वहीं खबर सामने आ रही है कि राजा गुट इस नाम पर मोहर लगने से नाराज है। कयास लगाए जा रहे थे प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी छिन जाने के बाद प्रतिभा सिंह को हाईकमान कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपेगा। खबरें में भी प्रतिभा सिंह का नाम राज्यसभा सीट के लिए आगे चल रहा था। मगर, अनुराग शर्मा का नाम सामने आने के बाद राजा गुट के समर्थकों इस बात को नहीं पचा पा रहे, वहीं हरियाणा में भी एक गुट नाराज बताया जा रहा है।
हिमाचल की राजनीति में कांगड़ा जिला बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि प्रदेश की सत्ता का संतुलन काफी हद तक इसी क्षेत्र से तय होता है। जिले में 15 विधानसभा सीटें हैं। मौजूदा राज्यसभा सांसद इंदू गोस्वामी भी कांगड़ा के बैजनाथ क्षेत्र से संबंध रखती हैं और कांग्रेस ने भी उसी इलाके से जुड़े नेता को मैदान में उतारा है।
राज्यसभा के लिए टिकट को लेकर पहले कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आ रहे थे। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह जैसे दिग्गज शामिल थे। हालांकि अंत में पार्टी नेतृत्व ने युवा चेहरे पर दांव लगाने का फैसला किया।
वर्तमान राज्यसभा सांसद इंदू गोस्वामी का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है। उससे पहले नए सदस्य का चुनाव होना है। नामांकन की प्रक्रिया आज शुरू हो रही है और इसके बाद जांच की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। यदि जरूरत पड़ी तो मतदान 16 मार्च को कराया जा सकता है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कुल 68 सदस्य हैं। इनमें सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, जो बहुमत के आंकड़े से पांच अधिक हैं। वहीं भाजपा के पास 28 विधायक हैं। ऐसे में यदि विपक्ष उम्मीदवार उतारता भी है तो उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ेगी।
फरवरी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव ने हिमाचल की राजनीति को झकझोर दिया था। उस समय कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद चुनाव परिणाम उसके खिलाफ चला गया था। क्रॉस वोटिंग के कारण भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन और कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को बराबर वोट मिले थे और लॉटरी प्रक्रिया में भाजपा को जीत मिली थी। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में बड़ा संकट खड़ा हो गया था, हालांकि बाद में स्पीकर द्वारा दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई किए जाने के बाद सरकार बच गई।