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August 29, 2025

हिमाचल में नगर निकाय चुनावों पर ब्रेक, सरकार को मिली दो साल तक चुनाव टालने की छूट

विधानसभा में नगर परिषद और नगर निगम संशोधन विधेयक पारित

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himachal Vidhan sabha

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को नगर परिषद और नगर निगमों से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस विधेयक के पारित होने के बाद राज्य सरकार को नवगठित नगर निकायों जिनमें नगर परिषद और नगर निगम शामिल हैं के चुनाव दो वर्षों तक स्थगित करने का अधिकार मिल गया है।

मंत्री अनिरुद्ध ने पेश किया विधेयक

संशोधन विधेयक को सदन में ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने प्रस्तुत किया। गौरतलब है कि यह विधेयक शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह की अनुपस्थिति में पेश किया गया। विधेयक पर चर्चा के बाद इसे बिना विरोध के पारित कर दिया गया।

 

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नए नगर निकायों में नहीं होंगे तत्काल चुनाव

राज्य सरकार ने इस वर्ष तीन नए नगर निगम हमीरपुर, ऊना और बद्दी और तीन नई नगर परिषदों का गठन किया था। सामान्य स्थिति में इन निकायों में गठन के बाद जल्द चुनाव कराए जाने थेए लेकिन अब विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद सरकार को यह छूट मिल गई है कि वह दो साल तक इन चुनावों को टाल सकती है।

स्टेट इलेक्शन कमीशन ने कर ली थी चुनाव की तैयारी

स्टेट इलेक्शन कमीशन इन नए निकायों में चुनाव कराने की तैयारी कर चुका था। आरक्षण रोस्टर लागू करने, मतदाता सूची का पुनर्गठन और भौगोलिक सीमांकन जैसे निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके थे। लेकिन संशोधित कानून के लागू होने के बाद अब यह प्रक्रिया दो साल के लिए ठंडे बस्ते में जा सकती है।

 

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विपक्ष का विरोध और कानूनी चुनौती की चेतावनी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस कदम की तीखी आलोचना की है। नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर, विधायक राकेश जम्वाल और सतपाल सिंह सत्ती ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और कहा कि यह जनता के अधिकारों का हनन है। उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा इस फैसले को अदालत में चुनौती दे सकती है। सत्ती ने कहा, "सरकार जानबूझकर चुनाव से बच रही है क्योंकि उसे जनता के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो गया है। नगर निकाय लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करते हैं, और ऐसे निर्णय उन्हें कमजोर करते हैं।"

 

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अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति पर भी उठा सवाल

सदन में आज का दिन सिर्फ नगर निकाय विधेयक तक ही सीमित नहीं रहा। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायकों ने अधिकारियों और कर्मचारियों को एक्सटेंशन और री-इम्प्लायमेंट देने के मुद्दे पर सरकार को घेरा। विधायक सतपाल सिंह सत्ती और विक्रम ठाकुर ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह वरिष्ठ अधिकारियों को सेवा विस्तार देने के लिए नियमों को दरकिनार कर रही है, जबकि पेंशनधारकों और परिवहन निगम (एचआरटीसी) कर्मचारियों को समय पर वेतन और पेंशन तक नहीं मिल रही।

 

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सत्ती ने कहा, "राज्य सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से असंतुलित हैं। पेंशनभोगी महीनों तक अपने हक की राशि का इंतजार करते हैं, वहीं दूसरी ओर रिटायर्ड अधिकारियों को दोबारा नियुक्त किया जा रहा है। यह व्यवस्था के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।"

सरकार की चुप्पी और संभावित असर

इन मुद्दों पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है, लेकिन विपक्ष के हमलों ने विधानसभा के मानसून सत्र को गरमा दिया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव टालने और अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति जैसे निर्णय आने वाले महीनों में राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।

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