#हादसा
August 29, 2025
हिमाचल: भारी बारिश से गिर गई पुलिस थाने के मेस की छत, होमगार्ड जवान चपेट में आया
जर्जर थाने का भवन बना खतरे की घंटी, पुलिसकर्मियों की जान पर बन आई
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ऊना। हिमाचल प्रदेश में पिछले दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने कई घरों को धराशायी कर दिया है। ऐसा ही कुछ अब ऊना जिला में भी हुआ है। यहां लोगांे की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे पुलिस का अपना ही थाना सुरक्षित नहीं था। दरअसल आज शुक्रवार सुबह सदर थाना मुख्यालय परिसर में मेस भवन की छत अचानक से धराशायी हो गई है। जिसकी चपेट में आने से एक जवान घायल हुुआ है।
बता दें कि जिला ऊना में पुलिस कर्मियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर गहरी चिंता जताई जा रही है, जहां पुराने और जर्जर भवनों में काम कर रहे पुलिस जवान अब सीधे खतरे का सामना कर रहे हैं। हाल ही की दो घटनाओं ने न केवल पुलिस विभाग की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही भी उजागर की है।
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शुक्रवार सुबह थाना सदर परिसर में एक बड़ा हादसा उस समय हुआ जब वहां की मेस की छत अचानक भरभरा कर गिर गई। इस हादसे में सिरमौर जिले से तैनात होमगार्ड जवान रामस्वरूप गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनकी टांग में गहरे जख्म आए और उन्हें 18 टांके लगाने पड़े। हादसे के तुरंत बाद उन्हें क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में भर्ती करवाया गया।
यह घटना मात्र एक इत्तेफाक नहीं बल्कि लंबे समय से उपेक्षित और जर्जर हो चुकी बुनियादी ढांचे की चेतावनी थी, जिसकी अनदेखी का खामियाजा पुलिस कर्मचारियों को अपनी जान जोखिम में डालकर भुगतना पड़ रहा है। अंग्रेजों के समय निर्मित थाना सदर की यह इमारत अब पूरी तरह से खतरनाक हो चुकी है, जिसमें बंदीगृह, कार्यालय और अन्य व्यवस्थाएं भी संचालित की जा रही हैं।
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हादसे के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार भाटिया ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर पूर्व में भी पत्राचार किया गया था और अब फिर से उच्चाधिकारियों को सूचित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता पर रखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
ऊना का महिला थाना भी बदतर स्थिति में कार्य कर रहा है। बरसात के मौसम में किराए की पुरानी इमारत में चल रहा यह थाना जलभराव की बड़ी समस्या से जूझता है। हाल ही में लगातार हो रही बारिश के चलते थाना परिसर में तीन से साढ़े तीन फुट तक पानी भर गया, जिससे ना केवल ड्यूटी करना मुश्किल हो गया बल्कि दस्तावेज़ और जरूरी फाइलें भी क्षतिग्रस्त हो गईं।
महिला पुलिस कर्मियों का कहना है कि बारिश के बाद कई दिनों तक बदबू और गंदगी बनी रहती है, जिससे स्वास्थ्य और कार्यक्षमता दोनों पर असर पड़ता है। स्टाफ ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक नया भवन नहीं बनता, तब तक उन्हें किसी सुरक्षित और उच्च स्थान पर स्थायी या अस्थायी व्यवस्था के तहत स्थानांतरित किया जाए।
इन घटनाओं ने पुलिस विभाग की कार्य स्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और खुद पुलिसकर्मियों का सवाल है कि आखिर कब तक जवान जान जोखिम में डालकर ड्यूटी निभाते रहेंगे? क्या सुरक्षा सिर्फ आम नागरिकों के लिए जरूरी है, और पुलिस कर्मियों की सुरक्षा गौण मानी जाती है?