#राजनीति
March 5, 2026
हिमाचल कांग्रेस की गुटबाजी हुई जगजाहिर: अनुराग को टिकट देने पर छलका आनंद शर्मा का दर्द, जताई नाराजगी
आनंद शर्मा बोले - राजनीति में सच बोलना अक्सर जुर्म माना जाता है
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा कांगड़ा जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर अंदरखाते असंतोष की आवाजें सामने आने लगी हैं। टिकट की दौड़ में सबसे आगे माने जा रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा का दर्द भी अब खुलकर सामने आ गया है। उनके बयान ने प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
राज्यसभा टिकट नहीं मिलने के बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि वह इसे निराशा नहीं कहेंगे, लेकिन राजनीति में स्वाभिमान की कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि अक्सर सच बोलना ही जुर्म माना जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को पार्टी हाईकमान तक नहीं ले जाएंगे और न ही इस संबंध में उनसे बात करेंगे। आनंद शर्मा ने कहा कि दशकों तक राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात रही है और वह हमेशा हिमाचल प्रदेश के लोगों के साथ खड़े रहेंगे।
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राजनीतिक गलियारों में उनके इस बयान को कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने राज्यसभा चुनाव के लिए नए चेहरे को आगे किया है, जिसके बाद यह विवाद और चर्चा तेज हो गई है। हालांकि आनंद शर्मा ने स्पष्ट किया कि वह पार्टी के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएंगेए लेकिन उनका कहना है कि सिद्धांतों से समझौता करना उनके स्वभाव में नहीं है।
दरअसल, राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की ओर से कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और अन्य वरिष्ठ नेताओं को इस सीट का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने कांगड़ा से जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक हलकों को चौंका दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनुराग शर्मा को टिकट मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पैरवी पर दिया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अनुराग शर्मा को टिकट देकर कांगड़ा जिले को साधने की रणनीति अपनाई है। कांगड़ा प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा जिला माना जाता है और पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां 15 में से 10 सीटें जीती थीं।
इसके बावजूद जिले को मंत्रिमंडल में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला था। ऐसे में राज्यसभा टिकट के जरिए कांगड़ा को संतुलित करने की कोशिश मानी जा रही है। अनुराग शर्मा को मुख्यमंत्री सुक्खू का करीबी भी माना जाता है, जिससे यह फैसला मुख्यमंत्री खेमे की मजबूत पकड़ का संकेत भी माना जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस फैसले के जरिए कांग्रेस नेतृत्व ने वीरभद्र सिंह खेमे को भी कुछ हद तक साइडलाइन करने की कोशिश की है। प्रतिभा सिंह और उनके समर्थकों का नाम भी राज्यसभा की संभावित सूची में शामिल बताया जा रहा था] लेकिन अंततः टिकट अनुराग शर्मा को मिलने से पार्टी के अंदर गुटीय समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
अनुराग शर्मा के नाम के ऐलान के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि अभी तक किसी बड़े नेता ने खुलकर विरोध नहीं किया है, लेकिन आनंद शर्मा के बयान को पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी का संकेत माना जा रहा है।