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July 31, 2025
हिमाचल में 'लॉटरी योजना' को मंजूरी, प्रदेश की आर्थिकी सुधारने को सुक्खू सरकार ने लिया बड़ा फैसला
प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिती सुधारने को सुक्खू सरकार शुरू करेगी सरकारी लॉटरी योजना
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई में सरकार ने कई अहम और सख्त फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश में वित्तीय संसाधनों की गंभीर कमी और बढ़ते खर्च के बीच अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए लॉटरी प्रणाली को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है। यह फैसला आज गुरुवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में लिया गया है। इस निर्णय को राजस्व बढ़ोतरी के एक प्रभावी साधन के रूप में देखा गया है।
बता दें कि प्रदेश सरकार लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रही है। कर्मचारियों के वेतन, पेंशन, विकास योजनाओं और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आवश्यक धन की कमी सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इन परिस्थितियों में मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रदेश की वित्तीय मजबूती के लिए कई वैकल्पिक उपायों पर विचार करना शुरू किया है। इन्हीं में से एक है सरकारी लॉटरी प्रणाली को दोबारा लागू करना।
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सूत्रों के अनुसार आज कैबिनेट बैठक में वित्त विभाग ने इस प्रस्ताव पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें देश के अन्य राज्यों की लॉटरी व्यवस्थाओं से होने वाले राजस्व का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया। इसके बाद एक कैबिनेट सब.कमेटी की सिफारिशों के आधार पर इसे मंजूरी दे दी गई। सरकार का अनुमान है कि लॉटरी के माध्यम से प्रदेश को हर साल 50 से 100 करोड़ रुपए तक की अतिरिक्त आय हो सकती है।
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बता दें कि इससे पहले साल 2014 में जब प्रदेश में वीरभद्र सिंह की सरकार थी। उस समय मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी इस लॉटरी योजना को शुरू करना चाहते थे। इसके उन्होंने कई बार संकेत भी दिए थे। लेकिन किन्ही कारणों से वह इस योजना को शुरू नहीं कर पाए थे। लेकिन अब वीरभद्र सिंह की इस इच्छा को प्रदेश की सुक्खू सरकार ने पूरी कर दिया है और इस योजना को लागू करने की मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह स्पष्ट किया है कि इस बार लॉटरी व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता और मजबूत नियंत्रण के साथ लागू किया जाएगा, ताकि इसके दुरुपयोग की कोई संभावना न रहे। सरकार का मानना है कि यदि इस प्रणाली को सही दिशा और नियमों के अनुसार संचालित किया जाए, तो यह न सिर्फ प्रदेश के राजस्व में वृद्धि करेगी, बल्कि आम जनता के बीच विश्वास भी कायम रखेगी।
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश में इससे पहले भी लॉटरी व्यवस्था संचालित होती थी, लेकिन जनविरोध और सामाजिक दुष्प्रभावों को देखते हुए 1998 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने इसे बंद कर दिया था। विरोध करने वालों का तर्क था कि इससे समाज में जुए और भ्रम जैसी प्रवृत्तियां बढ़ती हैं। हालांकि मौजूदा सरकार का मानना है कि आज के तकनीकी और नियामक युग में इस व्यवस्था को नियंत्रित और पारदर्शी ढंग से चलाना संभव है।
सरकार ने देश के अन्य राज्यों की लॉटरी व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया है। जैसे कि पंजाब को पिछले वित्तीय वर्ष में लॉटरी से करीब 235 करोड़, सिक्किम को 30 करोड़ और केरल को 13,500 करोड़ रुपए से अधिक की आय हुई है। हिमाचल सरकार अब इन्हीं राज्यों की टेंडर प्रक्रिया को अपनाकर अपनी लॉटरी प्रणाली शुरू करेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि व्यवस्था पूरी तरह से पेशेवर पारदर्शी और लाभकारी हो।
यह निर्णय हिमाचल सरकार के उस व्यापक विजन का हिस्सा है, जिसके तहत मुख्यमंत्री सुक्खू प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना चाहते हैं। प्राकृतिक आपदाओं, कर्ज और राजस्व की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हिमाचल के लिए यह एक साहसिक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में सरकार इसके अलावा और भी उपायों की घोषणा कर सकती है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।