#विविध
January 26, 2026
हिमाचल में आज 397 कैदियों की घर वापसी, सरकार ने दी राहत- सजा में मिली छूट
सजा की अवधि के अनुसार तय की गई रिमिशन
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शिमला। गणतंत्र दिवस के अवसर पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की जेलों में बंद कैदियों के लिए मानवीय और सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए सजा में विशेष छूट (रिमिशन) देने का निर्णय लिया है
सरकार के इस फैसले से प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद कुल 1083 कैदियों में से 397 पात्र कैदियों को सीधी राहत मिलेगी। यह रिमिशन 26 जनवरी की पूर्व संध्या से लागू मानी जाएगी। इस संबंध में महानिदेशक, कारागार एवं सुधार सेवाएं अभिषेक त्रिवेदी द्वारा सभी जेल अधीक्षकों को आवश्यक आदेश जारी कर दिए गए हैं।
राज्य सरकार ने साफ किया है कि यह छूट किसी को स्वतः नहीं दी जा रही, बल्कि केवल उन्हीं कैदियों को इसका लाभ मिलेगा- जिनका जेल में आचरण संतोषजनक रहा है और जिन्होंने अनुशासन एवं जेल नियमों का पालन किया है।
जेल प्रशासन द्वारा ऐसे बंदियों की सूची तैयार कर नियमानुसार रिमिशन लागू की जाएगी। सरकार का मानना है कि अच्छे व्यवहार को प्रोत्साहन देने से कैदियों में सुधार की भावना मजबूत होती है और वे समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित होते हैं।
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक कैद की अवधि के आधार पर रिमिशन की समयावधि अलग-अलग रखी गई है। जैसे कि-
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पूरी तरह कानूनी प्रावधानों के तहत लिया गया है। यह रिमिशन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 473, दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 432 और हिमाचल प्रदेश जेल मैनुअल 2021 के अध्याय-18 के अंतर्गत राज्य सरकार को प्राप्त अधिकारों के अनुसार दी जा रही है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि गंभीर और समाज विरोधी अपराधों में दोषी कैदियों को इस रिमिशन योजना से बाहर रखा गया है। इसमें NDPS एक्ट, POCSO एक्ट, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, UPA, आतंकवाद, फिरौती के लिए अपहरण, आदतन अपराधी, पैरोल से फरार रहे बंदी और अन्य संगीन मामलों में दोषी कैदी शामिल हैं। ऐसे अपराधों में सख्ती बरकरार रहेगी और उन्हें किसी प्रकार की सजा में छूट नहीं दी जाएगी।
सरकार का यह फैसला गणतंत्र दिवस की भावना के अनुरूप संवेदनशील, मानवीय और सुधारोन्मुख सोच को दर्शाता है। एक ओर जहां गंभीर अपराधों के प्रति सरकार का रुख सख्त बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर अच्छे आचरण वाले कैदियों को समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ने का अवसर देने की कोशिश भी की जा रही है। इससे न केवल जेलों में अनुशासन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सुधारात्मक व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।