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September 5, 2025

हिमाचल: दो घरों पर गिरा मलबा, 7 लोगों की छीन ली सांसें; ग्रामीण बोले- BBMB जिम्मेदार

ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, बीबीएमबी को ठहराया जिम्मेदार

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BBMB Against Protest

मंडी। हिमाचल प्रदेश में कई दिन तक हुई भारी बारिश ने जमकर कर बरपाया। राज्य के विभिन्न जिलों में भूस्खलन, मकान ढहने और सड़कें बंद होने जैसी घटनाओं से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। खासकर मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल स्थित जंगमबाग गांव में 2 सितंबर की शाम हुई भीषण भूस्खलन की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में सात लोगों की जान चली गई, जिनमें एक ही परिवार के चार सदस्य भी शामिल थे।

भूस्खलन से उजड़े सपने, दो घरों पर गिरा मलबा

2 सितंबर की शाम को मूसलाधार बारिश के चलते जंगमबाग गांव की पहाड़ियों से भारी मात्रा में मलबा अचानक नीचे आ गिरा। मलबे की चपेट में आकर दो मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए, जबकि आसपास के अन्य घरों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा। इस हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई, जबकि अन्य मृतकों में एक बुजुर्ग, एक सूमो चालक और एक स्कूटर सवार शामिल हैं।

 

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स्थानीयों का फूटा गुस्सा

हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है, लेकिन इसके साथ ही लोगों के भीतर गुस्सा भी उबाल मार रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह हादसा प्राकृतिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से मानव निर्मित आपदा है, जिसके लिए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) जिम्मेदार है। ग्रामीणों का आरोप है कि BBMB ने बरसात के मौसम में पाइपलाइन बिछाने के लिए खुदाई का कार्य शुरू कर रखा था, जिससे पहाड़ी का संतुलन बिगड़ा और यह हादसा हुआ।

 

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ग्रामीणों, जिनमें देवेंद्र राणा, संजय चौधरी, अनिल कुमार और शशि कला प्रमुख रूप से शामिल हैं, ने घटनास्थल पर इकट्ठा होकर BBMB के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने धरना दिया और नारेबाजी करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

पीड़ित परिवारों को मुआवजा और नौकरी की मांग

गांववालों ने स्पष्ट किया कि यदि BBMB ने अपनी जिम्मेदारी नहीं मानी और पीड़ित परिवारों को मुआवजा, घर निर्माण के लिए जमीन और एक सदस्य को नौकरी नहीं दी, तो वे कार्यालय का घेराव करेंगे और पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे में जिनके घर तबाह हो गए हैं, उन्हें BBMB की तरफ से वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही जो घर अब अनसेफ जोन में आ गए हैं, उनके पुनर्वास की व्यवस्था भी जल्द से जल्द की जानी चाहिए।

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प्रशासन भी हरकत में, जांच के आदेश

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। एसडीएम सुंदरनगर अमर नेगी ने कहा कि उन्हें लोगों से BBMB की लापरवाही की शिकायतें मिली हैं और इस संबंध में जवाब तलब किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद प्रभावित क्षेत्र के एक मकान को खाली करवाया गया है ताकि किसी और जान.माल का नुकसान न हो।

हिमाचल में बारिश बनी आफत

मंडी की यह घटना हिमाचल प्रदेश में अकेली त्रासदी नहीं है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी लगातार बारिश से तबाही मची हुई है। शिमला, कुल्लू, चंबा और कांगड़ा जैसे जिलों में भी भूस्खलन और घर गिरने की घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है। मौसम विभाग ने भी हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है।

 

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सरकार से जवाबदेही की मांग

इस भूस्खलन ने एक बार फिर राज्य की बुनियादी विकास परियोजनाओं की सुरक्षा और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर अगर लोगों की जान ही खतरे में पड़ जाए, तो ऐसी परियोजनाओं पर रोक लगाई जानी चाहिए। मंडी जिले का यह हादसा केवल एक गांव की त्रासदी नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश में हो रहे बेतरतीब निर्माण, कमजोर निगरानी और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति लापरवाही का गंभीर संकेत है। इस हादसे से उबरने में गांव को समय लगेगा, लेकिन अब जरूरत है कि जिम्मेदार एजेंसियों को जवाबदेह ठहराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां दोहराई न जा सकें।

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