#अव्यवस्था
January 22, 2026
हिमाचल : मनरेगा में फर्जी एंट्री! 131 ट्रांसजेंडरों के बने कार्ड- काम एक को भी नहीं मिला, होगी जांच
चुनावी आंकड़ों से भी मेल नहीं खा रहे मनरेगा के आंकड़े
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की हिमाचल प्रदेश पर आधारित ताजा रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है- उसे जानकर ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी हैरान हैं।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य में मनरेगा के तहत 131 ट्रांसजेंडर पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से एक को भी न तो रोजगार दिया गया और न ही एक भी कार्य दिवस सृजित हुआ। यह स्थिति न केवल मनरेगा की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाती है, बल्कि सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर भी गंभीर संदेह पैदा करती है।
राज्य में ट्रांसजेंडर समुदाय की इतनी बड़ी संख्या का मनरेगा में पंजीकरण पहली बार सामने आया है। यही कारण है कि रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद विभागीय स्तर पर भी हलचल मच गई है।
अब यह जांच का विषय बन गया है कि क्या वास्तव में ट्रांसजेंडर समुदाय की संख्या इतनी अधिक है या फिर पंजीकरण के दौरान आंकड़ों में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है।
अगर रिपोर्ट में दर्ज आंकड़े सही माने जाएं, तो सबसे अहम सवाल यह उठता है कि इतनी संख्या में पंजीकरण होने के बावजूद एक भी ट्रांसजेंडर को मनरेगा के तहत काम क्यों नहीं दिया गया। मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हर जरूरतमंद को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन यहां पर योजना का लाभ एक पूरे समुदाय तक पहुंच ही नहीं पाया।
रिपोर्ट के अनुसार, मनरेगा में पंजीकृत ट्रांसजेंडर की संख्या जिलेवार इस प्रकार हैं-
ब्लॉक स्तर पर देखें तो मंडी जिले के बालीचौकी में सबसे ज्यादा 10 ट्रांसजेंडर पंजीकृत दिखाए गए हैं। इसी तरह शिमला के ठियोग, कांगड़ा के नूरपुर व रैत, चंबा के मेहला और सिरमौर के शिलाई में भी अपेक्षाकृत अधिक संख्या दर्ज की गई है।
यह तथ्य इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान पूरे हिमाचल प्रदेश में थर्ड जेंडर या ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या महज 38 थी, जिनमें से 26 ने मतदान किया था। ऐसे में मनरेगा में 131 ट्रांसजेंडर का पंजीकरण होना स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े करता है।
इस पूरे मामले पर ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने भी हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं और इसकी वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर कहीं गलत पंजीकरण हुआ है या फिर किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई है, तो उसे दुरुस्त किया जाएगा।
यह मामला केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि मनरेगा जैसी अहम जनकल्याणकारी योजना की पारदर्शिता और क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करता है। अगर पंजीकरण वास्तविक है तो रोजगार न देना गंभीर चूक है, और अगर आंकड़े गलत हैं तो यह प्रशासनिक प्रणाली की बड़ी कमजोरी को उजागर करता है।