#विविध
January 25, 2026
हिमाचल बर्फबारी के बीच शादी करने पहुंचा दूल्हा, 7 KM तक चला पैदल- अंधरे में निभाई सभी रस्में
100 लोगों की जगह दूल्हे के साथ बारात में गए सिर्फ 20 लोग
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में जब कुदरत अपने सबसे कठिन रूप में सामने आती है, तब भी यहां के लोग हालात से हार नहीं मानते। जिला मंडी के सराज क्षेत्र से सामने आई यह शादी की कहानी इसी जज्बे की मिसाल बन गई है।
भारी बर्फबारी, बंद सड़कें, अंधेरा और सन्नाटा-इन सबके बीच भी दूल्हा अपनी बरात लेकर दुल्हन के घर पहुंचा और बर्फ की चादर ओढ़े गांव में विवाह की सभी रस्में निभाईं।
सराज क्षेत्र के बुनालीधार गांव निवासी गितेश ठाकुर का विवाह 24 जनवरी को बैंचड़ी गांव की ऊषा ठाकुर के साथ तय था। लेकिन 23 जनवरी को हुई अचानक और भारी बर्फबारी ने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी। सड़कें पूरी तरह बंद हो गईं, संचार और बिजली व्यवस्था भी ठप हो गई।
ऐसे हालात में जहां आमतौर पर लोग शादी टालने का फैसला कर लेते हैं, वहीं गितेश और उनके परिवार ने पीछे हटने के बजाय पैदल बरात ले जाने का साहसिक निर्णय लिया।
मौसम के कारण बड़ी बरात ले जाना संभव नहीं था। पहले जहां करीब 100 लोगों के शामिल होने की तैयारी थी, वहीं हालात को देखते हुए केवल 20 के आसपास करीबी रिश्तेदार और मित्र ही बरात का हिस्सा बन सके।
हिमाचल में बर्फ में 7 किलोमीटर पैदल बरात लेकर पहुंचा दूल्हा, अंधेरे में निभाई रस्में; परिवार बोला- यह तो शुभ संकेत pic.twitter.com/H9QAcWcmto
— kajol chauhan (@THEKAYCEEvoice1) January 25, 2026
दूल्हा खुद सबसे आगे चलते हुए अपने दोस्तों के साथ बर्फीले रास्तों पर निकल पड़ा। करीब दो से ढाई फीट जमी बर्फ के बीच, ऊबड़-खाबड़ और फिसलन भरे रास्तों को पार करना किसी चुनौती से कम नहीं था।
बरात दोपहर करीब सवा तीन बजे बुनालीधार से रवाना हुई। रास्ते में अंधेरा बढ़ता गया, ठंड और तेज होती चली गई, लेकिन दूल्हे और बरातियों के कदम नहीं रुके। लगभग सात किलोमीटर का कठिन सफर तय कर शाम करीब सात बजे बरात बैंचड़ी गांव पहुंची।
बर्फ से ढके गांव में जब बरात पहुंची, तो यह नजारा हर किसी के लिए भावुक और यादगार बन गया। बिजली न होने के कारण विवाह की सभी रस्में अंधेरे में, टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में पूरी की गईं।
सीमित संख्या में बराती, देवताओं की उपस्थिति और चारों ओर बर्फ-इन सबने इस शादी को सादगी और परंपरा से जुड़ा एक अनोखा रूप दे दिया। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि ऐसी शादियां जीवन भर याद रहती हैं, क्योंकि इनमें दिखावा नहीं, बल्कि सच्चा समर्पण और साहस होता है।
दूल्हे के पिता देवेंद्र ठाकुर ने बताया कि हिमपात को शुभ संकेत माना जाता है और इससे मांगलिक कार्यों में रुकावट नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बर्फबारी से क्षेत्र में बागबानी और कृषि को भी फायदा मिलेगा। तय कार्यक्रम के अनुसार, रविवार सुबह दुल्हन को भी पैदल ही बुनालीधार लाया जाएगा।