#उपलब्धि
January 25, 2026
हिमाचल के लिए यह 26 जनवरी बेहद खास : दिल्ली कर्तव्य पथ पर प्रदेश के शौर्य को बयां करेगी झांकी
कर्तव्य पथ पर गूंजेगी हिमाचल के वीर सपूतों की अमर गाथा
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शिमला। जिस प्रदेश की मिट्टी में शौर्य बसता हो, जहाँ की हवाएँ बलिदान की कहानियाँ सुनाती हों- वही हिमाचल प्रदेश एक बार फिर देश के दिल यानी दिल्ली में अपनी गूंज दर्ज कराने जा रहा है। पाँच वर्षों के लंबे इंतजार के बाद कल यानी 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस परेड में हिमाचल प्रदेश की झांकी कर्तव्य पथ पर कदम रखेगी। यह सिर्फ एक झांकी नहीं होगी, बल्कि उन वीर सपूतों की जीवंत गाथा होगी, जिन्होंने तिरंगे की आन के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
इस बार हिमाचल अपनी वादियों की सुंदरता नहीं, बल्कि अपनी वीरता की पहचान लेकर आ रहा है। देवभूमि कहलाने वाला यह प्रदेश उतना ही गर्व से वीरभूमि भी है। झांकी का विषय “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” रखा गया है, जिसमें हिमाचल के वीरता पुरस्कार विजेता सैनिकों की परंपरा, उनका साहस और बलिदान सजीव रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
जब यह झांकी कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ेगी, तो वह लकड़ी और रंगों की संरचना भर नहीं होगी, बल्कि उन माताओं की धड़कन होगी, जिन्होंने अपने लाल देश को सौंप दिए, और उन पिताओं का गर्व होगी, जिन्होंने अगली पीढ़ी को भी राष्ट्र सेवा के लिए तैयार किया।
रक्षा मंत्रालय द्वारा देश के 17 राज्यों की झांकियों का चयन किया गया है, जिनमें हिमाचल प्रदेश को स्थान मिलना पूरे प्रदेश के लिए सम्मान का विषय है। भाषा एवं संस्कृति विभाग की निदेशक रीमा कश्यप के अनुसार, यह झांकी हिमाचल की वीर परंपरा, देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगी।
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री के मार्गदर्शन और सचिव राकेश कंवर के दिशा-निर्देशों में यह उपलब्धि संभव हो सकी। हिमाचल प्रदेश ने अब तक देश को 1,203 वीरता पदक विजेता दिए हैं, जिनमें चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र और दस महावीर चक्र शामिल हैं। यह आंकड़े नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस का प्रमाण हैं जो इस प्रदेश की रगों में बहता है। यहाँ के पहाड़ सिर्फ ऊँचे नहीं, बल्कि यहाँ के लोगों के हौसले भी हिमालय से बड़े हैं।
झांकी में हिमालय की पृष्ठभूमि में तिरंगा फहराते भारतीय सैनिकों की प्रतिमा देशभक्ति का भाव जगाती है। इसके साथ दो सेना अधिकारी सलामी की मुद्रा में दर्शाए गए हैं, जो देश की रक्षा में समर्पित भारतीय सेना को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इन वीर सपूतों की गाथा होगी शामिल, झांकी में हिमाचल प्रदेश के गौरव...
इस ऐतिहासिक झांकी का डिजाइन जवाहरलाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, शिमला के सहायक आचार्य अमन नेगी ने तैयार किया है। अमन नेगी मूल रूप से किन्नौर जिले के रूघी गांव से हैं। उन्होंने बताया कि कला के प्रति रुचि उन्हें बचपन से रही और इसमें उनके पिता विमल नेगी की प्रेरणा अहम रही।
इससे पहले भी हिमाचल प्रदेश की झांकी कई बार राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश की पहचान बन चुकी है—
5 वर्षों तक प्रयासों के बावजूद मंजूरी न मिलना निराशाजनक रहा, लेकिन इस बार वीरता की थीम ने वह सम्मान दिलाया, जिसका प्रदेश हकदार था। अब जब पाँच साल बाद हिमाचल की झांकी फिर से कर्तव्य पथ पर उतरेगी, तो यह सिर्फ एक राज्य का प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि भारत की सैन्य आत्मा को नमन होगा।
यह झांकी हर उस सैनिक को सलाम है जो बर्फीली चोटियों पर तैनात है, हर उस शहीद को श्रद्धांजलि है जिसने हमारी नींदों की कीमत अपनी जान से चुकाई। हिमाचल का संदेश साफ है, यहाँ के बेटे कल भी देश के साथ थे, आज भी हैं और कल भी रहेंगे।