#विविध
January 7, 2026
हिमाचल में ठिठुरती ठंड, मगर बर्फ गायब : खेती पर संकट बढ़ा, आज 7 जिलों में कोहरे का अलर्ट
किसानों-बागवानों की बढ़ी चिंता, कैसे लगेगी फसल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सर्दी ने एक बार फिर अपना असर तेज कर दिया है। मौसम विभाग ने आज के लिए प्रदेश के मैदानी और निचले इलाकों में घने कोहरे को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। मगर हिमाचल में जनवरी महीने में भी बर्फबारी ना होने के कारण किसानों-बागवानों की चिंता बढ़ गई है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर जिलों के निचले क्षेत्रों में सुबह 10 बजे तक घना कोहरा छाने की संभावना है। कई स्थानों पर विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम हो सकती है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
खासकर नेशनल हाईवे, औद्योगिक क्षेत्रों और स्कूल-कॉलेज जाने वाले मार्गों पर चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। घने कोहरे और गिरते तापमान का असर किसानों और बागवानों पर भी पड़ सकता है।
निचले इलाकों में सब्जियों और नगदी फसलों पर पाले का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों की मानें तो इस मौसम में आलू, मटर, फूलगोभी, टमाटर जैसी फसलों को नुकसान हो सकता है। बागवानों को भी सेब, खुमानी और अन्य फलों के पौधों को ठंड से बचाने के लिए आवश्यक उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।
पर्यटन की दृष्टि से देखें तो प्रदेश में अगले छह दिनों तक मौसम साफ रहने का अनुमान है। इस दौरान कहीं भी बारिश या बर्फबारी की संभावना नहीं जताई गई है, जिससे पहाड़ी पर्यटन स्थलों की ओर आने वाले पर्यटकों को राहत मिलेगी। हालांकि, सुबह के समय कोहरे और रात की ठंड को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अगले छह दिन तक मौसम शुष्क और साफ बना रहेगा। आसमान साफ रहने से दिन में धूप खिलने की संभावना है, लेकिन रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है।
वहीं, हिमाचल प्रदेश में रबी सीजन के दौरान बने सूखे जैसे हालात अब खेती के लिए गंभीर संकट का रूप ले चुके हैं। लंबे समय से बारिश न होने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में गेहूं की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है।
राज्य कृषि निदेशालय को फील्ड से मिली ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पूरे प्रदेश में 9,359 हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल पर सूखे का असर पड़ा है, जबकि 3,087 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब कई इलाकों में बुआई का समय भी निकल गया है और दोबारा बुआई संभव नहीं रह गई है।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मिट्टी में नमी की भारी कमी के कारण लगभग 10 प्रतिशत क्षेत्र में गेहूं की बुआई हो ही नहीं पाई। यानी रबी सीजन की शुरुआत में ही किसानों को बड़ा झटका लगा है। राज्य में दिसंबर माह तक कुल 3,55,347 हेक्टेयर भूमि पर रबी फसलों की बुआई होनी थी, लेकिन पर्याप्त बारिश न होने के चलते यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका।
हिमाचल प्रदेश में गेहूं रबी सीजन की सबसे प्रमुख फसल मानी जाती है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर, सोलन और सिरमौर जिलों में होता है। इसके अलावा शिमला, चंबा और कुल्लू के निचले इलाकों में भी गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। लेकिन इस बार इन सभी क्षेत्रों में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई जिलों में खेतों की मिट्टी सूखी पड़ी है और पौधों को जरूरी नमी नहीं मिल पा रही है।
सूखे जैसे हालात ने किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ा दी है। रबी सीजन से किसानों को सालभर की आय की बड़ी उम्मीद रहती है, लेकिन शुरुआती दौर में ही फसल प्रभावित होने से उनकी मेहनत और लागत दोनों पर खतरा मंडरा रहा है। अब किसानों की नजरें आसमान पर टिकी हैं और वे अच्छी बारिश की दुआ कर रहे हैं, ताकि फसल को कुछ राहत मिल सके और नुकसान कम हो सके।