#विविध
October 28, 2025
हिमाचल: बल्क ड्रग पार्क निर्माण के लिए कटेंगे 45, 600 पेड़, 35 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार
ऊना के हरोली में बल्क ड्रग फार्मा पार्क निर्माण की प्रक्रिया शुरू
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला के हरोली क्षेत्र में प्रस्तावित बल्क ड्रग फार्मा पार्क अब आकार लेने जा रहा हैए लेकिन इसके लिए पर्यावरण को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। 45600 पेड़ों की बलि देकर इस बल्क ड्रग पार्क का निर्माण किया जाएगा। बड़ी बात यह है कि वन विभाग ने 45,600 पेड़ों में से 21,702 पेड़ों को काटने की अनुमति दे दी है। हालांकि वन विभाग शेष 23,898 पेड़ों को सरंक्षित रखेगा। यह परियोजना प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है, मगर साथ ही पर्यावरणीय संतुलन को लेकर भी कई सवाल खड़े कर रही है।
हिमाचल सरकार के उद्योग विभाग के अनुसार बल्क ड्रग फार्मा पार्क के निर्माण क्षेत्र में आने वाले कुल 45,600 पेड़ों में से पहले चरण में 21,702 पेड़ों को काटने की मंजूरी मिल चुकी है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बाकी पेड़ों को फिलहाल सुरक्षित रखा जाएगा। दूसरे चरण में 222 पेड़ों में से 146 को काटने और 76 को संरक्षित रखने की अनुमति दी जाएगी। पेड़ों की कटाई वन विकास निगम की देखरेख में होगी और यह कार्य तभी शुरू होगा जब परियोजना का डिजाइन अंतिम रूप ले लेगा, ताकि अतिरिक्त पेड़ों की अनावश्यक कटाई न हो।
यह भी पढ़ें : घर से झूठ बोलकर निकला था राजीव, अब गोबिंद सागर में मिली देह- जानें क्या है मामला
परियोजना के पहले चरण में उत्पादन दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जमीन को समतल करने का टेंडर जारी किया जा चुका है। दो चरणों में यह कार्य पूरा किया जाएगा। उद्योग विभाग के अनुसार पेड़ों की कटाई के बाद ही साइट डेवलपमेंट, सड़क निर्माण, बाउंड्री वॉल और पुलों के निर्माण का कार्य आरंभ होगा।
उद्योग विभाग ने दावा किया है कि परियोजना निर्माण के लिए जितने पेड़ काटे जाएंगे, उतने ही नए पेड़ पुनर्वनीकरण योजना के तहत अन्य स्थानों पर लगाए जाएंगे। इसके लिए हरित पट्टी विकास योजना के तहत विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है। विभाग का कहना है कि पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए पूर्ण सावधानी बरती जाएगी।
यह भी पढ़ें : हिमाचल ने लगाई ऊंची छलांग- सोलन जिला सबसे अमीर, रिपोर्ट में हुए कई खुलासे- जानें पूरी खबर
केंद्र सरकार ने 21 मार्च 2020 को इस महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी थी। परियोजना की कुल लागत 1,923 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें से 1,118 करोड़ रुपये केंद्र सरकार देगी और 804.54 करोड़ रुपये राज्य सरकार वहन करेगी। यह पार्क 1,402.44 एकड़ भूमि में स्थापित होगा और सरकार का दावा है कि इसके जरिये करीब 35 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके भीतर लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश, जबकि बाहरी क्षेत्रों में 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश होने की संभावना जताई जा रही है।
इस पार्क में फार्मा उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चा माल (बल्क ड्रग्स) तैयार किया जाएगा। अब तक मैनकाइंड, अरविदो, सन फार्मा समेत लगभग 50 नामी कंपनियां निवेश करने की इच्छुक हैं। वर्तमान में भारत को फार्मा निर्माण के लिए चीन से कच्चा माल आयात करना पड़ता है, लेकिन इस पार्क के शुरू होने के बाद यही सामग्री देश में ही उपलब्ध होगी। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि दवा उत्पादन की लागत भी कम होगी।
यह भी पढ़ें : HRTC स्कूली बच्चों सहित इन सभी के लिए बनाने जा रही हिम बस कार्ड, चुकाने होंगे इतने पैसे
पार्क में 321 करोड़ रुपये की लागत से एक बॉयलर प्लांट स्थापित किया जाएगा। साथ ही उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के शोधन के लिए 284 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया जाएगा। ट्रीट किए गए पानी का उपयोग सिंचाई कार्यों में किया जाएगा, ताकि जल संसाधनों का पुनः उपयोग सुनिश्चित हो सके।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : मोड़ पर अचानक ड्राइवर ने खोया बैलेंस, नहीं बच पाए 2- मासूम की हालत नाजुक
आरडी नजीम अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग विभाग ने बताया कि बल्क ड्रग फार्मा पार्क के निर्माण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। कई टेंडर जारी किए जा चुके हैं और शीघ्र ही कार्य प्रारंभ होगा। पेड़ों की कटाई केवल निर्धारित सीमा के भीतर ही की जाएगी तथा उतनी ही संख्या में नए पौधे लगाए जाएंगे।