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February 14, 2026
हिमाचल के शिक्षा ढांचे में बड़ा फेरबदल: सुक्खू सरकार ने 62 स्कूल किए मर्ज, बनेंगे सहशिक्षा संस्थान
स्कूल शिक्षा निदेशालय ने प्रधानाचार्यों को दस्तावेज के साथ किया तलब
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के सैंकड़ों स्कूल कॉलेजों को या तो बंद कर दिया है, या फिर मर्ज कर दिया है। कांग्रेस सरकार ने कम संख्या का हवाला देते हुए अब तक 100 से अधिक स्कूल कॉलेजों को बंद कर दिया है। अब इसी कड़ी में सुक्खू सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 62 और स्कूलों को मर्ज करने का फैसला लिया है।
सुक्खू सरकार ने अब 500 मीटर से एक किलोमीटर की दूरी पर अलग.अलग परिसरों में संचालित हो रहे छात्र और छात्राओं के 62 विद्यालयों को एकीकृत कर 31 सहशिक्षा विद्यालय बनाने की मंजूरी दी है। यानी अब ये संस्थान एक ही परिसर में संचालित होंगे।
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12 फरवरी को आयोजित कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध कराने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम उपलब्ध हो सके।
स्कूल शिक्षा निदेशालय ने संबंधित सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को आवश्यक दस्तावेज़ों के साथ निदेशालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। आवेदन प्रक्रिया विभागीय स्तर पर ही पूरी की जाएगी। सरकार ने पहले 100 सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई से जोड़ा थाए अब यह संख्या बढ़ाकर 140 करने की योजना हैए जिसमें ये 31 नवगठित सहशिक्षा विद्यालय भी शामिल होंगे।
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सरकार का कहना है कि इस कदम से शिक्षकों की कमी दूर होगी और उपलब्ध संसाधनों का समुचित उपयोग हो सकेगा। अलग-अलग स्कूलों में बंटे स्टाफ को एक जगह तैनात कर संतुलन बनाया जाएगा। भवन, प्रयोगशालाएं और खेल सुविधाएं साझा होने से आधारभूत ढांचे का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में करीब 1250 स्कूलों को या तो बंद किया गया है या मर्ज किया गया है। इनमें लगभग 450 ऐसे विद्यालय थे, जहां विद्यार्थियों का नामांकन शून्य था। सरकार का दावा है कि यह कदम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और अनावश्यक व्यय कम करने के उद्देश्य से उठाया गया।
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बिलासपुर, घुमारवीं, चंबा, हमीरपुर, नादौन, देहरा, धर्मशाला, इंदौरा, नगरोटा, नूरपुर, पालमपुर, ज्वालामुखी, कुल्लू, मंडी, सुंदरनगर, नाहन, पांवटा साहिब, अर्की, नालागढ़, सोलन, ऊना, जुब्बल, रामपुर, रोहड़ू और ठियोग सहित कई क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं के अलग-अलग विद्यालयों को एकीकृत किया गया है।
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जहां सरकार इसे शिक्षा सुधार और संसाधन संतुलन की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष पहले भी स्कूल बंदी और मर्ज नीति को लेकर सवाल उठाता रहा है। आलोचकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों का मर्ज होना विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त दूरी और असुविधा का कारण बन सकता है। फिलहाल सरकार अपने निर्णय को शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में आवश्यक कदम बता रही है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि सहशिक्षा और एकीकरण की यह नीति विद्यार्थियों को कितनी सुविधा और गुणवत्ता प्रदान कर पाती है।