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February 14, 2026

सुक्खू सरकार के हाल! 75 छात्रों को पढ़ा रही मात्र एक शिक्षिका, पढ़ाई के साथ टॉयलेट भी कर रही साफ

पढाई के अलावा शिक्षिका को रिकॉर्ड देखना, झाड़ू और टायलेट भी करने पड़ रहे साफ

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govt school Shree renuka ji

नाहन। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनते ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने व्यवस्था परिवर्तन का नारा दिया था। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों को या तो बंद कर दिया या मर्ज कर दिया, ताकि अन्य अन्य स्कूलों में शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सके। सुक्खू सरकार प्रदेश के सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता शिक्षा देने के बड़े.बड़े दावे भी करती रही है। लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है। इसका ताजा उदाहरण हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र से सामने आई है। यहां के जीपीएस भुवाई स्कूल मात्र एक  मुख्य अध्यापिका के सहारे चल रहा है। 

75 बच्चों की पढ़ाई, एक ही अध्यापिका

दरअसल करीब 75 विद्यार्थियों वाले इस स्कूल में एक महिला सेंट्रल हेड टीचर ही पढ़ाई का पूरा दायित्व संभाल रही हैं। यह महिला शिक्षिका ना सिर्फ बच्चों को अलग अलग कक्षाओं में पढ़ा रही है, बल्कि क्लर्क से लेकर चपरासी तक के सभी काम भी इसी शिक्षिका को करने पड़ रहे हैं। यह मुख्य अध्यापिका झाड़ू से लेकर टॉयलेट तक साफ करती है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब एक ही शिक्षक पर इतना अधिक बोझ होगा, तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल पाएगी।

 

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शिक्षिका ही अध्यापकए शिक्षिका ही कर्मचारी

बताया जा रहा है कि इस स्कूल में 75 छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए मात्र एक ही शिक्षिका है। बड़ी बात यह है कि शिक्षिका बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं करवाती, बल्कि  विद्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के अभाव में टॉयलेट की सफाई, झाड़ू-पोंछा और अन्य दैनिक व्यवस्थाएं भी उसी को करनी पड़ रही हैं। 

पांच अन्य स्कूलों की निगरानी भी

स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान वीरेंद्र के अनुसार यह शिक्षिका न केवल भुवाई स्कूल की जिम्मेदारी निभा रही हैं, बल्कि इस केंद्र के अधीन आने वाले पांच अन्य प्राथमिक विद्यालयों की निगरानी का दायित्व भी उनके पास है। एक व्यक्ति पर शिक्षा, प्रशासनिक कार्य और साफ-सफाई जैसी जिम्मेदारी डालना व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।

 

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सेवानिवृत्ति के बाद और गहराएगा संकट

विद्यालय में कार्यरत एक अन्य सामान्य शिक्षक अप्रैल माह में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आने वाले समय में पूरा स्कूल पूरी तरह एक ही शिक्षिका के सहारे रह जाएगा। इससे बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।

ग्रामीणों ने उठाई नियुक्ति की मांग

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि 75 से अधिक बच्चों वाले विद्यालय को एक ही शिक्षक के भरोसे चलाना शिक्षा विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि स्कूल में शीघ्र अतिरिक्त शिक्षकों और सफाई कर्मचारी की नियुक्ति की जाए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।

 

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क्या कहते हैं शिक्षा विभाग के अधिकारी

उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा विभाग जिला सिरमौर राजीव ठाकुर का कहना है कि उन्हें इस संबंध में औपचारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही संबंधित विद्यालय के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होगी, व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा।

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