#राजनीति
February 14, 2026
हिमाचल: आर्थिक संकट के बीच 11 दिन के केरल दौरे पर गई सीएम सुक्खू की टीम, 10 सदस्य शामिल
विपक्ष ने उठाए सवाल आर्थिक मंदी के बीच सुक्खू सरकार कर रही फिजुलखर्ची
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शिमला। हिमाचल प्रदेश इस समय गहरे आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने के बाद राज्य की वित्तीय स्थिति और अधिक दबाव में आ सकती है। ऐसे हालात में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार जहां एक ओर फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने और आय के नए स्रोत तलाशने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांगड़ा की कृषि उपज विपणन समिति की 10 सदस्यीय टीम केरल दौरे पर निकल गई है। इस दौरे पर होने वाले लाखों रुपये के खर्च को लेकर अब सियासी हलकों में सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार APMC कांगड़ा की टीम 11 फरवरी को कांगड़ा से चंडीगढ़ तक ट्रैवलर वाहन से रवाना हुई और वहां से हवाई मार्ग के जरिए केरल पहुंची। यह दौरा 21 फरवरी तक चलेगा। पूरे 11 दिन के इस टूर का खर्च APMC कांगड़ा स्वयं वहन कर रही है। दल में APMC चेयरमैन नरेंद्र कुमार चौधरी (निशू) सदस्य जसवंत धड़वाल, सुरेश पताकू, करतार सिंह, रविंदर राणा, विजय राणा और अजय कुमार शामिल हैं। इनके अतिरिक्त सचिव शगुन सूद] एक अकाउंटेंट, महिला कर्मी ज्योति और एक गाइड भी टीम का हिस्सा हैं। बताया गया है कि यह दौरा राज्य मार्केटिंग बोर्ड और सरकार की पूर्व मंजूरी के बाद आयोजित किया गया है।
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APMC की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक इस दौरे का उद्देश्य केरल की मंडियों में विकसित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चरए भंडारण व्यवस्था और फल.सब्जियों की मार्केटिंग प्रणाली का अध्ययन करना है। चेयरमैन नरेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि टीम नई तकनीकों, कोल्ड स्टोरेज सिस्टम, ई.मार्केटिंग मॉडल और मंडी प्रबंधन की कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास कर रही है।
शुक्रवार को टीम ने मुन्नार क्षेत्र की एक टी-.फैक्ट्री का भी दौरा किया, जहां प्रसंस्करण और पैकेजिंग की आधुनिक व्यवस्था का अवलोकन किया गया। उनका कहना है कि यदि इन मॉडलों को कांगड़ा की मंडियों में लागू किया जाए तो किसानों को बेहतर मूल्य और सुविधाएं मिल सकती हैं।
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इस बीच हिमाचल भाजपा ने इस दौरे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने इसे सरकारी खर्च पर सैर-सपाटा करार देते हुए कहा कि प्रदेश पहले से ही आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार आर्थिक तंगी का हवाला देती है, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों और बोर्ड सदस्यों को दूसरे राज्यों के दौरे पर भेजा जा रहा है। भाजपा का कहना है कि जब सरकार खुद वित्तीय अनुशासन की बात कर रही है, तब इस तरह के दौरे विरोधाभासी संदेश देते हैं। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार का कार्यकाल अब दो साल से कम रह गया है। ऐसे में पूरे बोर्ड को 11 दिन के टूर पर भेजने से किसानों को वास्तविक और त्वरित लाभ कितना मिलेगाए यह स्पष्ट नहीं है।
राज्य मार्केटिंग बोर्ड के चेयरमैन कुलदीप पठानिया ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है और इस दौरे की अनुमति उनके कार्यभार ग्रहण करने से पहले ही दी जा चुकी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस टूर के विस्तृत कार्यक्रम और खर्च संबंधी पूरी जानकारी नहीं है।
प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह मुद्दा अब केवल एक विभागीय दौरे तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ सरकार खर्चों में कटौती और संसाधन जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है, तो दूसरी तरफ APMC टीम के इस केरल दौरे पर लाखों रुपये खर्च होने की संभावना जताई जा रही है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केरल से लौटने के बाद APMC टीम अपने अध्ययन की रिपोर्ट में क्या ठोस सुझाव देती है और क्या उन सुझावों को जमीनी स्तर पर लागू किया जाता है। यदि इससे कांगड़ा के किसानों को बेहतर बाजारए आधुनिक सुविधाएं और अधिक आमदनी मिलती हैए तो यह दौरा सार्थक माना जाएगा। अन्यथाए आर्थिक संकट के दौर में इसे अनावश्यक फिजूलखर्ची के उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।