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November 11, 2025
सुक्खू सरकार का व्यवस्था परिवर्तन: अब सिर्फ सरकारी स्कूलों के मेधावी छात्रों को ही मिलेंगे लैपटॉप-टैबलेट
प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों के मेधावी छात्रों को इस योजना से किया बाहर
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने प्रदेश के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले मेधावी छात्रों को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अब निजी स्कूलों के मेधावी छात्रों को ई गैजेट लैपटॉप और टैबलेट ना देने का निर्णय लिया है। सुक्खू सरकार के इस फैसले से निजी स्कूलों के मेधावी छात्रों को बड़ा झटका लगा है। हालांकि जनता सरकार के इस फैसले को छात्रों के मनोबल गिराने वाला बता रही है।
दरअसल हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने मेधावी विद्यार्थियों को दिए जाने वाले ई-गैजेट (लैपटॉप और टैबलेट) वितरण योजना में बड़ा बदलाव किया है। अब यह सम्मान केवल सरकारी स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों तक ही सीमित रहेगा। निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इस योजना से बाहर कर दिया गया है। सरकार ने इसे व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकारी शिक्षा संस्थानों को प्रोत्साहन देने की दिशा में अहम कदम बताया है।
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पिछले तीन वर्षों से यह पुरस्कार योजना ठप पड़ी हुई थी। अब सरकार ने स्कूल शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिए हैं कि वह नए सिरे से केवल सरकारी स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों की सूची तैयार करे। निदेशालय को दिसंबर के अंत तक पूरी प्रक्रिया को पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। सूत्रों की मानें तो अब सरकार तीन सालों के मेधावियों को अब एक साथ ई गैजेट बांटेगी।
इस योजना के तहत पहले राज्य में हर वर्ष करीब 10 हजार मेधावी विद्यार्थी जिनमें दसवीं, बारहवीं और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र शामिल होते थे को लैपटॉप या टैबलेट बांटे जाते थे। लेकिन अब प्रदेश की सुक्खू सरकार ने निजी स्कूलों को इस योजना से बाहर कर दिया है, जिससे मेधावियों की संख्या घट जाएगी।
सूत्रों के अनुसारए सरकार एक साथ तीन साल के मेधावियों को सम्मानित करने की योजना बना रही है। माना जा रहा है कि सुक्खू सरकार अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने के मौके पर इस वितरण कार्यक्रम को राज्यभर में भव्य रूप से आयोजित कर सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि 31 दिसंबर से पहले सभी चयनित विद्यार्थियों को लैपटॉप आवंटित कर दिए जाएं।
शिक्षा विभाग के अनुसार पात्र विद्यार्थियों को ₹16,000 के वाउचर प्रदान किए जाएंगे। विद्यार्थी चाहें तो इसी राशि से लैपटॉप या टैबलेट खरीद सकते हैं, या फिर अपनी पसंद का महंगा गैजेट लेकर शेष राशि स्वयं वहन कर सकते हैं। खरीद प्रक्रिया राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन के माध्यम से की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो।
योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने एक ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है। इस पोर्टल पर विद्यार्थी अपनी जानकारी और शैक्षणिक विवरण अपलोड करेंगे। इसके बाद वे अपनी पसंद के ई.गैजेट का चयन कर सकेंगे। विभाग का कहना है कि इससे वितरण प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगी।
सुक्खू सरकार का यह कदम सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मनोबल को बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार यह फैसला उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगा जो सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर प्रदर्शन करते हैं। राज्य सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा दोनों बढ़ें।
वहीं, निजी स्कूलों के अभिभावकों और शिक्षकों में इस निर्णय को लेकर असंतोष की स्थिति है। उनका कहना है कि मेधावी तो हर स्कूल में होते हैं, इसलिए उन्हें अलग करना अनुचित है। हालांकि सरकार का तर्क है कि यह योजना मूल रूप से सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।