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October 2, 2025

अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव: तहसीलदार ने किया देव परंपरा का अपमान, जूतों समेत पहुंचा देव शिविर; हुआ हंगामा

अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के पहले दिन तहसीलदार ने किया देव परंपरा का अपमान

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Kullu International Dussehra

कुल्लू। देवभूमि हिमाचल का सबसे बड़ा पर्व अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव गुरुवार शाम भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में शुरू हो गया। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने इस महोत्सव का शुभारंभ किया और हजारों श्रद्धालुओं के साथ इस दिव्य क्षण के साक्षी बने। रथयात्रा के दौरान करीब सौ से अधिक देवी.देवता ढालपुर पहुंचे और पूरा मैदान देवमयी हो गया। इस बार कुल 332 देवी.देवताओं को न्योता भेजा गया है, जिनमें से सैकड़ों देवता अपने.अपने अस्थायी शिविरों में विराजमान हो चुके हैं।

तहसीलदार की हरकत से भड़के देवलू

अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के पहले ही दिन एक बड़ी लापरवाही ने माहौल को गरमा दिया। दरअसल, भगवान भृंग ऋषि के शिविर में तहसीलदार जूते पहनकर पहुंच गया। देव परंपरा के खिलाफ इस हरकत को देखकर देवता के साथ चलने वाले देवलू भड़क गए और उन्होंने मौके पर ही तहसीलदार को बाहर का रास्ता दिखा दिया। कुछ देर तक वहां हंगामा भी हुआ। देव परंपरा के प्रति इस तरह की असंवेदनशीलता ने लोगों को आक्रोशित कर दिया। हालांकि लोगों ने बाद में तहसीलदार को शिविर से बाहर निकाल दिया।

 

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देवलोक में तब्दील हुआ ढालपुर मैदान

बता दें कि भगवान रघुनाथ की रथयात्रा शुरू होते ही पूरा ढालपुर मैदान देवध्वनियों और लोक नृत्यों से गूंज उठा। दोपहर करीब दो बजे भगवान रघुनाथ पुलिस के कड़े पहरे में पालकी में सवार होकर अपने देवालय से ढालपुर के लिए रवाना हुए। इस पल के साक्षी खुद प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला भी बने और उन्होंने भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में जाकर आशीर्वाद लिया।

 

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आज पहले ही दिन कुल्लू का ढालपुर मैदान किसी देवलोक से कम नहीं लग रहा था। अपने.अपने देवताओं के साथ देवलू नाचते-गाते भगवान रघुनाथ की नगरी में पहुंचे। सबसे दूर आनी-निरमंड क्षेत्र से 150 - 200 किलोमीटर की यात्रा कर 16 देवी-देवता पहुंचे, वहीं माता हिडिंबा भी पूरे लाव.लश्कर के साथ रामशिला और बिजली महादेव होते हुए सुल्तानपुर पहुंचीं। 

सात दिन चलेगा महोत्सव

आज से शुरू हुई इस अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव अगले सात दिन तक चलेगा। सात दिन बाद यह देवलोक मिलन का प्रतीक महोत्सव समाप्त होगा। महोत्सव का समापन 7 अक्तूबर को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी इसमें शिरकत करेंगे।

 

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आपदा प्रभावितों को समर्पित है उत्सव

दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह ठाकुर ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव का ध्येय वाक्य आपदा से उत्सव की ओर रखा गया है। हाल ही में प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा को देखते हुए इस बार कई गतिविधियों में कटौती की गई है और करोड़ों रुपये की बचत आपदा प्रभावितों की मदद पर खर्च की जाएगी।

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365 वर्षों से चल रही परंपरा

भगवान रघुनाथ के सम्मान में यह पर्व पिछले 365 वर्षों से मनाया जा रहा है। 1660 ईसवी में शुरू हुई यह परंपरा आज भी उसी आस्था और श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। देवताओं का यह महाकुंभ न केवल हिमाचल बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।

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