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June 9, 2025
सुक्खू सरकार यहां लगा रही हिमाचल का सबसे बड़ा सोलर प्रोजेक्ट, सीएम ने किया ऐलान
सोलर प्रोजेक्ट लगने से सर्दियों में नहीं खरीदनी पड़ेगी बिजली
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किन्नौर। हिमाचल प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सुक्खू सरकार ने कई सख्त फैसले लिए हैं। सीएम सुक्खू ने जहां कई पावर प्रोजेक्टस को हिमाचल की शर्तों पर देने का निर्णय लिया है, वहीं कई पावर प्रोजेक्ट्स को सरकार खुद तैयार करवा रही है। इतना ही नहीं कई नए प्रोजेक्ट भी लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ताकि भविष्य में इन नए प्रोजेक्ट्स से हिमाचल की आर्थिकी को और मजबूती मिल सके।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने किन्नौर दौरे के दौरान राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐलान किया कि कांगड़ा जिले में हिमाचल का सबसे बड़ा सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की क्षमता 200 मेगावाट होगी। यह परियोजना राज्य की अब तक की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना होगी और इसे हिमाचल पावर कॉरपोरेशन द्वारा विकसित किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार उन छोटे ऊर्जा उत्पादकों की मदद के लिए तैयार है जो कर्ज में डूबे हुए हैं। जिन परियोजनाओं का निर्माण 50 फीसदी से अधिक पूरा हो चुका है, उनके लिए सरकार विस्तृत अध्ययन कर रही है और जल्द ही ठोस फैसले लिए जाएंगे। यह राहत कैबिनेट की विशेष समिति की सिफारिशों के आधार पर दी जाएगी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्दियों में जब बिजली की मांग अधिक होती है, हिमाचल को अक्सर दूसरे राज्यों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। लेकिन अब राज्य में सोलर, हाइड्रो और जियोथर्मल परियोजनाओं के विकास से यह निर्भरता खत्म होगी। विशेष रूप से पेखूबेला 32 मेगावाट, अघलार और भंजाल जैसी परियोजनाओं को विकसित किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन हो सके।
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मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि हिमाचल की अमूल्य जल और ऊर्जा संपदा का दोहन अब राज्य सरकार की अपनी कंपनी, हिमाचल पावर कॉरपोरेशन द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब सार्वजनिक उपक्रमों को राज्य की संपदा दी जा सकती है, तो फिर राज्य की अपनी एजेंसियों को क्यों नहीं
सुक्खू ने पूर्ववर्ती जयराम सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने बिना शर्त सतलुज जल विद्युत निगम (SJVN) को धौलासिद्ध, लुहरी और सुन्नी परियोजनाएं दे दीं, जिनमें प्रदेश को 12% मुफ्त रॉयल्टी भी नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह सीधी राज्य की संपदा की लूट है जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने दोहराया कि अब कोई भी केंद्रीय या अन्य एजेंसी हिमाचल की ऊर्जा परियोजनाएं तभी ले सकेगी जब वह राज्य सरकार की शर्तों को मानेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर बातचीत के लिए पत्र आया हैए लेकिन हिमाचल सरकार ने इन परियोजनाओं पर हुए निवेश का पुनर्मूल्यांकन शुरू कर दिया है।