#विविध

January 7, 2026

पंचायत चुनाव पर संशय बरकरार, हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला; जानें क्या बोली सुक्खू सरकार

पंचायत चुनाव पर सुक्खू सरकार ने रखा अपना पक्ष बोली समय पर चुनाव करवाना संभव नहीं

शेयर करें:

panchyat election

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया अब आमने.सामने आ चुकी है। एक ओर विपक्ष सुक्खू सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर सरकार प्रशासनिक मजबूरियों का हवाला दे रही है। हाईकोर्ट की सक्रियता और लगातार सुनवाई यह संकेत दे रही है कि इस मामले पर जल्द बड़ा फैसला सामने आ सकता है, जो प्रदेश की पंचायत राजनीति की दिशा तय करेगा। वहीं हिमाचल हाईकोर्ट भी इस मामले को जल्द निपटाने के मूड में नजर आ रहा है। यही वजह है कि याचिका पर मंगलवार के बाद बुधवार को भी लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई और सरकार को अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखना पड़ा।

पंचायत चुनाव पर घमासान

प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर करवाने को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को राज्य सरकार ने हिमाचल हाईकोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा। सरकार ने अदालत से पंचायत चुनाव संपन्न करवाने के लिए कम से कम छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा है। सरकार की ओर से कहा गया कि चुनाव टालने की कोई मंशा नहीं है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में समय पर चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। सरकार ने तर्क दिया कि नई पंचायतों, पंचायत समितियों, जिला परिषदों और नगर निगमों की परिसीमा निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

 

यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट में सुक्खू सरकार की फिर हुई फजीहत... इस बार 50 हजार की लगाई कास्ट, जानें क्यों

हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने बुधवार की सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत के रुख से साफ संकेत मिले हैं कि वह पंचायत चुनाव से जुड़े इस विवाद को लंबा खींचने के पक्ष में नहीं है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ कर रही है। लगातार दूसरे दिन हुई सुनवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि अदालत इस मामले में जल्द स्पष्ट दिशा.निर्देश देने की तैयारी में है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में पशु-वन-बिजली मित्र के बाद अब होगी रोगी मित्र भर्ती- जानें जिम्मेदारी और सैलरी डिटेल

सरकार बहाने बनाकर चुनाव टाल रही

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि राज्य चुनाव आयोग पहले ही पंचायत चुनाव से जुड़ी सामग्री सभी उपायुक्तों को भेजने के निर्देश दे चुका है। इसके अलावा 17 नवंबर को पूरे प्रदेश में आदर्श आचार संहिता भी लागू कर दी गई थी। याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि राज्य चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और समय पर चुनाव करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि सरकार आपदा और परिसीमा निर्धारण का हवाला देकर पंचायत चुनाव को टालने की कोशिश कर रही है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल में घर-जमीन खरीदना हुआ महंगा, सुक्खू सरकार ने चार गुना बढ़ा दी रजिस्ट्रेशन फीस

परिसीमा बाद में भी हो सकती है

याचिकाकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि नई पंचायतों और जिला परिषदों की परिसीमा का काम चुनाव के बाद भी जारी रह सकता है। उन्होंने अदालत से कहा कि परिसीमा निर्धारण के आदेशों की आड़ में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।

क्या बोली सरकार

सरकार ने अदालत को बताया कि पंचायत और जिला परिषदों की परिसीमा को लेकर जारी अधिसूचना को हाल ही में हाईकोर्ट की एक अन्य खंडपीठ ने निरस्त कर दिया है। साथ ही लोगों को 10 जनवरी तक आपत्तियां दर्ज करने का समय दिया गया है। सरकार का कहना है कि ऐसी स्थिति में चुनाव प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कम से कम छह महीने का समय अनिवार्य रूप से लगेगाए ताकि कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों से बचा जा सके।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख